नारी मौन साधक
1जीवन एक संघर्ष, एक चुनौती है जिसे हर इंसान को स्वीकारना पड़ता है। संघर्ष में न सिर्फ़ उन्हें ऊर्जस्विता मिलती है, बल्कि जीवन के विविध रूप से उनका परिचय भी होता है। मानव समाज का इतिहास स्त्री को सत्ता, प्रभुत्व
जीवन एक संघर्ष, एक चुनौती है जिसे हर इंसान को स्वीकारना पड़ता है। संघर्ष में न सिर्फ़ उन्हें ऊर्जस्विता मिलती है, बल्कि जीवन के विविध रूप से उनका परिचय भी होता है। मानव समाज का इतिहास स्त्री को सत्ता, प्रभुत्व
महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहयोग से एसआयईएस कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं कथा यू.के.(लन्दन) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद (२७-२८ जनवरी २०१२) प्रवासी हिंदी साहित्य:उपलब्धियां और अपेक्षाएं प्रवासी साहित्य की आलोचना का नया मापदंड विकसित
सालों के इंतज़ार के बाद वह दिन आया जब नसीम बानो को इन्साफ मिला. पांच साल पहले एल दिन वह काम से घर लौट रही थी जब राहत अली नाम के व्यक्ति ने तेज़ाब से भरी बाटली उसके चहरे पर
“श्री सेतपाल जी ज़िंदगी को बारीकी से पकड़ते हैं और उसे जीवंत बनाते है। इन लघुकथाओं में ज़िंदगी धड़कती है, ज़िंदगी रोती है, ज़िंदगी जीने के रास्ते निकालती है।“ यही सच है जिसका ज़िक्र छेड़ा है श्री कमल किशोर गोयनका
कल और आज के बीच का यह पल मेरा है और यही वह समय है जिसमें मैं उस सचाई से परिचित हुई हूँ कि मैं वो नहीं जो कुछ करती हूँ करता कोई और है मैं वो नहीं जो सुनती
कुरूक्षेत्र हम ही कौरव हम ही पाँडव देह धर्म की बात है करते आँख मींच अनजाने बनकर राह अधर्म की चलते हैं “कर्म कर्म” कह कर अपने आप को ढगते हैं फिर भी राह उसी पर चलते ढूँढ रहे पहचान
लडाई लड रही हूँ /मैं भी अपनी /शस्त्र उठाये बिन खुद को मारकर/जीवन चिता पर लेटे लेटे. गाँधी का उदाहरण सत्याग्रह, बहिष्कार/तज देना सब कुछ अपने तन, मन से॥ ऐसा ही कुछ मैं भी /कर रही हूँ खुद से वादा/अपने अँदर
The Jersey City hall on 15th August 2011 The event was conducted in cooperation with the Honourable Mayor Jerramiah Healy, Medical Practitioner Group, Govinda Army, Young patriots, Friends of India and Senior cultural affairs. The Flag was hoisted with an
देश की खातिर जीना शान देश की खातिर मरना शान जिससे कम हो शान वतन की ऐसा कुछ भी न कर नादान॥ भारत माँ है जननी मेरी मैं उसकी लायक सँतान कहो करूँ क्या उसको अर्पण तन, मन, धन और
यह कल्पना ऍक ममतामयी, करुणामयी नारी, जो असहाय स्थिती में पनपकर संघर्ष का हर पत्थर पार करने के बावजूद अपने उन बच्चों के जन्म का कारण तो बन सकती है पर बच्चों की भूख नहीं मिटा सकती है॥ ऍक कशमकश