About ब्रज किशोर सिंह

मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक समानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.

आत्मघाती है केंद्र सरकार की खैराती अर्थनीति

मित्रों,काफी दिन पहले मैंने प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित होनेवाली मासिक पत्रिका बाल भारती में एक बाल कहानी पढ़ी थी। एक राज्य में वयोवृद्ध राजा की मृत्यु के बाद उसका युवा पुत्र राजा बना। वह बड़ा दानी और दयालु था। दोनों हाथों से दान करता। उसके राज्य में कोई भी दुःखी नहीं था सिवाय वृद्ध मंत्री के। धीरे-धीरे खजाने में राजस्व वसूली घटने लगी और खजाना खाली हो गया। दुःखी राजा ने मंत्री से →आगे पढ़ें ..

क्या चर्चिल ने ठीक कहा था ?

मित्रों,साहित्य के लिए वर्ष 1953 के नोबेल पुरस्कार विजेता और ब्रिटेन के कथित महानतम प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय भारत को आजादी देने की मांग को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि भारत के लोग अभी इतने परिपक्व नहीं हुए हैं कि वे देश और आजादी को संभाल सकें। तब से न जाने कितनी बार खासकर चुनावों के बाद मैं खुद अपने देश के महानतम् बुद्धिजीवियों को यह लिखते-कहते हुए देख चुका →आगे पढ़ें ..

फिर से दोहराया जाएगा 1962 ?

मित्रों,हम भारतीयों की यह सन् 47 की ही आदत है कि हम इतिहास से सबक नहीं लेते और उसे बार-बार अपने-आपको दोहराने का मौका देते रहते हैं। चाहे पाकिस्तान का मुद्दा हो या आतंकवाद का या फिर कांग्रेस को सत्ता में लाने का,क्या सरकार और क्या जनता दोनों ने ही कभी इतिहास से सबक नहीं लिया। पाकिस्तान बार-बार हमारी पीठ में छुरा भोंकता रहता है फिर भी हम उसको गले लगाने के लिए हमेशा बेताब बने रहते हैं,आतंकी →आगे पढ़ें ..

गरीब सवर्ण आरक्षण से बाहर क्यों?

मित्रों,मैं अपने बहुत पहले लिखे एक आलेख ' गरीबी जाति नहीं देखती जनाब ' में इस विषय पर विस्तार से विचार कर चुका हूँ कि भारत में गरीबी सर्वव्यापी है। अगर एक चमार गरीब है तो एक राजपूत भी गरीब है अर्थात् न तो गरीबों की कोई खास जाति होती है और न ही गरीबी की ही। मित्रों,पिछले दो दशकों से भारत में और बिहार में भी सरकारी नौकरियों में 50 % आरक्षण लागू है। अगर बैकलॉग हुआ तो नियुक्ति विशेष में आरक्षण इससे →आगे पढ़ें ..

पाकिस्तान से क्या सीखे भारत ?

मित्रों,क्या आप शीर्षक देखकर हैरान हो रहे हैं? कहीं आप यह तो नहीं सोंच रहे कि पाकिस्तान तो हमारा चिरशत्रु देश है फिर उससे सीखना कैसा और वह हमें सिखा ही क्या सकता है? अगर ऐसा है तो फिर आप भूल रहे हैं कि रावण जब युद्ध-भूमि में घायल होकर मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहा था तब राम ने लक्ष्मण को उससे शिक्षा लेने के लिए भेजा था। बेशक आज के पाकिस्तान में रोजाना बहुत-कुछ ऐसा सकारात्मक घट रहा है जिससे हम →आगे पढ़ें ..

पवार सुखी जनता दुःखी

मित्रों,यूँ तो वर्तमान केन्द्र सरकार आम आदमी की सरकार है लेकिन यह जब-न-तब तेल का दाम बढ़ाकर जनता का तेल निकालती रहती है। महँगाई से मर रही जनता को महँगाई बढ़ाकर राहत देकर इन दिनों सोनिया-मनमोहन सिंह की सरकार नवीन अर्थशास्त्र का निर्माण कर रही है। इसने पहले पेट्रोल और रासायनिक खाद को नियंत्रण मुक्त किया और अब चीनी को भी उद्योगपतियों के हवाले कर दिया है। वह दिन दूर नहीं जब पूरा-का-पूरा वतन →आगे पढ़ें ..

भवानी प्रसाद मिश्र की प्रासंगिकता

मित्रों,हम हिन्दीभाषियों को अपनी भाषा और अपने लेखकों-कवियों से कितना प्रेम है कहने की जरूरत नहीं है। हम एक तरफ तो हिंदी की बदहाली का रोना रोते हैं वहीं दूसरी ओर अपने बच्चों को सिर्फ अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ने भेजते हैं। आज हममे से कितने लोगों को याद होगा या पता होगा कि इस साल हमारे किन-किन लेखकों-कवियों की जन्मशताब्दी है? भले ही हमें याद हो या नहीं हो लेकिन सच तो यही है कि अगर अभी महाकवि →आगे पढ़ें ..

यार केजरीवाल तू बाबला है क्या

मित्रों,वैसे तो मेरी सोच और मेरा स्वभाव शुरू से ही युवा साम्यवादियों जैसा रहा है। मैंने हमेशा यथास्थिति को शिव के पिनाक धनुष की तरह पुनर्वार भंग करने का,तोड़ने का प्रयास किया है लेकिन मुझे इस बात को लेकर कभी गफलत नहीं रही है कि वर्तमान काल में ऐसा करना काफी कठिन है और दिन-ब-दिन कठिन से कठिनतर होता जानेवाला है। मैंने अपने एक आलेख में कई साल पहले ही लिखा था कि आज अगर गांधी भी साक्षात् आ →आगे पढ़ें ..

नालंदा में रंगदारी नहीं देने पर थानेदार ने की हत्या

मित्रों,हम बिहारियों के शब्दकोश में बिहार पुलिस के कई पर्यायवाची दर्ज हैं। कोई इन्हें सरकारी कुत्ता कहता है तो कोई सरकारी दामाद। इन्हें कुत्ता इसलिए नहीं कहा जाता है क्योंकि यह जनता की रक्षा करती है बल्कि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जनता को काट खाती है और सरकारी दामाद इसलिए क्योंकि इनको मुफ्तखोरी की बहुत बुरी आदत होती है। लालू राज में भी ऐसा देखने आता रहा है कि कभी-कभी मुफ्त में सामान →आगे पढ़ें ..

जिन्दगी बेमजा हो गई हो जैसे

जिन्दगी एक सजा हो गई हो जैसे, जिन्दगी बेमजा हो गई हो जैसे। यूँ तो जीते रहे हम जिंदादिल की तरह, पर कहीं कोई कमी-सी रह गई हो जैसे। कतरा-कतरा करके बालू की तरह, मुट्ठी से जिंदगी रिस गई हो जैसे। जाड़े की धूप की तरह खुशियाँ, चढ़ते-चढ़ते ढल गई हों जैसे। किसी को फर्क नहीं मेरे होने या न होने से, स्टेशन पर खड़े-खड़े ट्रेन छूट गई हो जैसे। अब बेरंग है हर होली और बेनूर दिवाली, मेरी तरह इनमें भी तासिर →आगे पढ़ें ..

बिहार में सूचना के बदले मिली मौत

मित्रों,सुशासन की सरकार बिहार के निवासियों को सूचना का अधिकार अद्वितीय तरीके से प्रदान कर रही है। उनको सूचना मांगने का अनन्य अधिकार तो दे दिया गया है लेकिन सूचना पाने का अधिकार नहीं दिया गया है अलबत्ता कोई सूचनार्थी अगर सूचना मांगने की गुस्ताखी करने बावजूद जीवित या बिना जेल गए रह जाए तो उसे जरूर सुशासन का शुक्रगुजार होना चाहिए। इस बार सूचना मांगने की सजा पाई है एक अधिवक्ता रामकुमार →आगे पढ़ें ..

दिल्ली में आम आदमी का हल्ला बोल

मित्रों,भारत की राजनीति में लगातार प्रयोग हो रहे हैं। दुर्भाग्यवश हमारे अधिकतर राजनैतिक दल और राजनेता आज भी यथास्थितिवादी हैं। ऐसे राजनेताओं और दलों की तुलना हम मजे में मच्छर,खटमल या जोंक से कर सकते हैं। कुछ की तुलना जूँ से भी की जा सकती है जो खून पीने के बाद उसका रंग भी बदल देती है। इनमें से कुछ तो पूरी तरह से रंगे सियार हैं तो कुछ सिर्फ अपनी पूँछ रंगकर काम चला रहे हैं। कुछ गिरगिट की →आगे पढ़ें ..

गलत उदाहरण होगा संजय दत्त को माफी देना

मित्रों,कई साल पहले मैंने दो खबरें पढ़ी-सुनी थी। पहली अमेरिका से थी और दूसरी इंग्लैंड से लेकिन दोनों ही नाबालिगों द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाने से संबंधित थीं। पहली घटना में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति और तत्कालीन विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्ति जार्ज डब्ल्यू बुश की बेटी शराब पीकर गाड़ी चलाती हुई वाशिंगटन में स्थानीय पुलिस द्वारा पकड़ी गई थी। उस पर पुलिस ने जुर्माना किया →आगे पढ़ें ..

माँ,कैसे कटेगा सफर बिना हमसफर?

माँ,मैं नहीं जानता कि तुमने इस दुनिया को क्यों बनाया?तुम्हारी इस शरारत के पीछे तुम्हारा मकसद क्या था? लेकिन इतना तो निश्चित है कि मुझे तेरी दुनिया रास नहीं आई। तुम्हारी दुनिया में कहीं न्याय नहीं है। हर जगह सिर्फ अव्यवस्था,अत्याचार और अन्याय है। मैंने इस उम्मीद पर तुम्हारी दुनिया में घर बसाया था कि तेरी दुनिया में कम-से-कम मेरा हमसफर तो जिन्दगी के हर मोड़ पर,हर कदम पर मेरा हमकदम होगा। →आगे पढ़ें ..

क्या चाहते हैं उमर अब्दुल्ला?

मित्रों,आप सब भी जानते हैं कि कल श्रीनगर में सीआरपीएफ के कैंप पर आतंकवादी हमला हुआ जिसमें 5 जबान शहीद हो गए। श्रीनगर में पदस्थ रहे एक अधिकारी के मुताबिक, बुधवार के हमले के वक्त 100 में से सिर्फ 10 जवानों के पास हथियार थे। इन्होंने हिम्मत दिखाकर दो हमलावरों को मार गिराया। अगर सभी के पास हथियार होते तो वे बाकी आतंकवादियों को भागने नहीं देते। मौत को लेकर बल के अफसरों और जवानों में खासा रोष है। →आगे पढ़ें ..

छोटी ड्यूटी कब निभाएगी टाटा?

मित्रों,अब तक मैं शब्दों में बात करता रहा हूँ लेकिन इस दफे मैं दृश्यों में बात करूंगा। दृश्य एक:- स्थान-घाटो,जिला-रामगढ़,झारखंड। प्रतिष्ठित टाटा इस्पात कंपनी की कोलियरी का एक मजदूर अपना वेतन प्राप्त करने आया हुआ है। पहले उसको 20 हजार मासिक मेहनताना मिल रहा था परंतु इस बार उसे हाथ आए हैं मात्र 5 हजार रूपए। जैसे कि कंपनी उनके साथ साँप-सीढ़ी का खेल खेल रही हो और उस खेल में उसके 99 पर पहुँच चुके →आगे पढ़ें ..

रेलयात्रियों से लूट वो भी राउंड फिगर में

मित्रों,लगता है कि यूपीए के मंत्रियों ने पद-ग्रहण के समय संविधान और सत्यनिष्ठा की शपथ नहीं ली थी बल्कि जनता को लूटने की शपथ ली थी। जब बाँकी मंत्री जनता को लूट चुके तब अब बारी आई है रेलमंत्री पवन कुमार बंसल की। मित्रों,हुआ यह कि अभी कुछ दिन पहले मेरे पिताजी को हाजीपुर से महनार रोड जाना था। पहले इस 30 किमी की दूरी का पैसेन्जर ट्रेन का भाड़ा था 5 रू.। पिताजी ने एक टिकट लिया और 10 का नोट काउंटर क्लर्क →आगे पढ़ें ..

अबीदीन की देशभक्ति को सलाम

मित्रों,पाकिस्तान के प्रधानमंत्री परवेज अशरफ की भारत यात्रा के विरोध में अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान जैनुअल अबीदीन भी खड़े हो गए हैं। अबीदीन ने कहा है कि उन्होंने फैसला किया है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के दरगाह पर आने का वो विरोध करेंगे। अबुदीन ने साथ ही कहा कि वो प्रधानमंत्री के लिए जियारत भी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर मैं पाकिस्तान के पीएम की जियारत में मदद करता हूं, तो यह →आगे पढ़ें ..

नीतीश से मोदी की तुलना करने वाले सच नहीं जानते !

मित्रों,इन दिनों नीतीश बनाम मोदी की चर्चा खूब जोरों पर है। कुछ लोग दोनों के कथित विकास-मॉडल की तुलना करने में लगे हुए हैं। ऐसा करनेवाले वे लोग हैं जो जानते ही नहीं हैं कि नीतीश कुमार ने बिहार को क्या दिया है और बिहार के किन-किन क्षेत्रों को विनष्ट कर दिया है,बिहार से क्या-क्या छीन लिया है। बिहार की हकीकत को सिर्फ वही समझ सकता है जो बिहार में रह कर इसका प्रत्यक्ष अनुभव करता हो वरना मीडिया →आगे पढ़ें ..

बिना ईंजन की गाड़ी है बजट

मित्रों,क्या विडंबना है कि जिस भारत से दुनियाभर के लोग घनघोर वैश्विक मंदी में विकास का ईंजन बनने की उम्मीद लगा रहे थे उसकी अर्थव्यवस्था आज स्वयं मंदी के दलदल में जा फँसी है। जब वित्त मंत्री पी.चिदम्बरम बजट पेश करने जा रहे थे तो दुनियाभर के अर्थव्यवस्था-विशेषज्ञों की निगाहें इस बात पर लगी थीं कि मंदी से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था में विद्यमान चार महती समस्याओं को दूर करने के लिए वे →आगे पढ़ें ..