यूपी का जातीय गणित
1पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान और नितीश की जीत के बाद राजनितिक पंडितों ने कहा कि बिहार में जाति की राजनीत खत्म हो गयी है | जबकि ऐसा नहीं है बिहार में सत्ता समीकरण को बदलने वाली जातियां
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान और नितीश की जीत के बाद राजनितिक पंडितों ने कहा कि बिहार में जाति की राजनीत खत्म हो गयी है | जबकि ऐसा नहीं है बिहार में सत्ता समीकरण को बदलने वाली जातियां
सरकार अपना महत्वकांक्षी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पेश कर चुकी है। इस विधेयक के मुताबिक केन्द्र सरकार देश की 63.5 फीसदी आबादी को सस्ती कीमत पर राशन मुहैया कराएगी। मसलन ग्रामीण भारत की 75 फीसदी आबादी इसके दायरे
सरकार ने खाद्य सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया है। विधेयक के मुताबिक केन्द्र सरकार 63.5 फीसदी आबादी को सस्ते दरों में राशन मुहैया कराएगी। मसलन ग्रामीण भारत की 75 फीसदी आबादी जिसमें से 46 फीसदी को प्राथमिकता में
बजट 2011- 12 में सरकार ने कृषि ऋण का लक्ष्य 4.75 लाख करोड़ रखा है। यह पिछले साल के मुकाबले 1 लाख करोड़ ज्यादा है। ऋण खेती की एक बुनियादी आवश्यकता है। खासकर भारत जैसें देश में जहां 81 फीसदी
बढ़ती आबादी की मांग को देखते हुए इस देश को दूसरी हरित क्रांति की जरूरत है। खाद्यान्न के रिकार्ड तोड़ उत्पादन के बावजूद कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। हालांकि भारत सरकार ने 11वी
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में नई खरीद नीति को हरी झंडी दे दी। इस साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह ने लालकिले की प्राचीर से भ्रष्टाचार से लड़ने के उपायों की घोषणा करते हुए इस नीति का
लोकपाल बिल 2011 लोकसेवकों के लिए भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए लोकपाल संस्था का गठन करना। पब्लिक इंटरेस्ट डिस्क्लोजर एंड प्रोटेक्शन टू पर्सन मेकिंग डिस्क्लोजर्स बिल 2010 लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार जानबूझकर अधिकारों के दुरूपयोग की शिकायत
कौन गरीब? कितने गरीब? गरीब वो जो प्रतिदिन अपने दिनचर्या के लिए शहरों में 32 रूपया और गांव में 26 रूपये खर्च कर सकता है। यह हलफनामा योजना आयोग ने सुप्रीट कोर्ट में पेश किया है। गौर करने की बात
भारत में जनसंख्या के हिसाब से डाक्टरों का खासा टोटा है। शहरों में डाक्टर जरूर मौजूद हैं मगर राज्यों और खासकर ग्रामीण इलाकों में यह हालत चिन्ताजनक हैं। आज विश्व मानदंडों से हम कहीं मेल नही खाते। हाल की में
क्या आपको पता है , संसदीय कार्यसूचि में प्रतिदिन 20 लिखित सवाल पूछे जाते है। इन सवालों के लिए सांसदों को 21 दिन का नोटिस देना होता है। ताकि मंत्रालयों को जवाब तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।