Articles By: बरुण कुमार सिंह

बलात श्रम (बंधुआ मजदूरी ) एक अभिशाप

0 2012/05/01 12:41 pm

1 मई 2012 श्रमिक दिवस पर विशेषः बहुत से लोगों की यह अवधारणा है कि बलात श्रम का मतलब है, लम्बे घंटों तक खराब स्थितियों में बहुत कम वेतन पर काम करना। लेकिन इससे इतर दो परिस्थितियां जरूर लागू होती

नर्सरी एडमिशन में पैसों का खेल फिर भी सरकार कहे सबको है शिक्षा का अधिकार !

नर्सरी एडमिशन में पैसों का खेल फिर भी सरकार कहे सबको है शिक्षा का अधिकार !

0 2012/02/06 4:08 pm

बरूण कुमार सिंह देश की राजधानी दिल्ली में नर्सरी में दाखिले को लेकर जिस तरह से पब्लिक स्कूल मनमानी कर रहे हैं कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पहले सुपरस्टार एवं सुपरनायिका की फिल्में को देखने के लिए जितनी भीड़

भिक्षा बनी रोशनी : स्वामी रामदास

0 2011/10/26 11:19 pm

स्वामी रामदास का यह नियम था कि वे स्नान एवं पूजा से निवृत्त हो भिक्षा मांगने के लिए केवल पांच ही घर जाते थे और कुछ न कुछ लेकर ही वहां से लौटा करते। एक बार उन्होंने एक घर के

प्रेम की स्तुति

0 2011/09/20 5:50 pm

देवर्षि नारद खीझ-से गये थे, क्योंकि तीनों लोकों में राधा की स्तुति हो रही थी। वे स्वयं भी श्रीकृष्ण से कितना प्रेम करते हैं। इसी मानसिक संताप को मन में छिपाये वे श्रीकृष्ण के पास पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि

अन्ना की गूंज सड़क से संसद तक

अन्ना की गूंज सड़क से संसद तक

2 2011/08/31 6:16 pm

एक वर्ष पूर्व तक भारत में महाराष्ट्र के बाहर अन्ना हजारे को जानने वाले कितने लोग थे? लेकिन लोगों के तनाव और गुस्से की थाह का अंदाज लगाने में विफल रही सरकार ने महज छह महीनों में अन्ना को देश

आजादी का झुनझुना

आजादी का झुनझुना

3 2011/08/14 4:44 pm

भारत और इंडिया के बीच खाई बढती ही जा रही है | हम किस आजादी की बात करते हैं? कभी-कभी लगता है कि ऊपर वाले का इंसान में यकीन नहीं है। जन्म की दुर्घटना कभी किसी झुग्गी में होती है,