Articles By: आशीष कु० मिश्रा

जामिया ने लटकाई एक मासूम की जिंदगी

जामिया ने लटकाई एक मासूम की जिंदगी

1 2011/03/16 9:35 pm

चार साल पहले एक ऐसी चंचल लड़की से मिला था  जिसे देखकर ऐसा लगता था मानो उसने दुख या उदासी कभी देखी ही न हो। हर वक्त हंसना खिलखिलानाए सबके साथ उठना बैठना ए सबसे बातें करनाए दोस्ती करनाए रोते

मलाईदार राजनीति

मलाईदार राजनीति

1 2011/03/14 10:40 am

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अन्य पिछड़ा वर्ग के मालदार यानी की क्रीमी लेयर तबके के लिये वार्षिक आमदनी की न्यूनतम सीमा को ढाई लाख से बढ़ा कर चार लाख कर दिया है। सरकार की दलील है कि इस

षड़यंत्र की शिकार दिल्ली की लोकल रेल

षड़यंत्र की शिकार दिल्ली की लोकल रेल

2 2011/02/26 2:40 pm

दस साल पहले भी दिल्ली में लोकल ट्रेन चलती थी आज भी चल रही है । वही रंग-रूप वही सीटें वही पटरियां और स्टेशन भी वही। हां लेकिन भीड़ कुछ बढ़ गई है, लोगों की भी और जेबकतरों की भी।

बदलाव की कहानी

2 2011/02/06 1:28 pm

अक्सर हम कुछ लोगों से या कुछ चीजों से दूरी बना लेते हैं । कई बार बिना किसी कारण के उनसे धृणा करने लगते हैं । जिनके बारे में या तो हम अनभिज्ञ होते हैं या फिर हमारा पूर्वाग्रह उन

धर्म का कारोबार

धर्म का कारोबार

4 2011/02/01 1:34 pm

भारत एक ऐसा देश है जहां धर्म का कारोबार सबसे तेजी से फल फूल रहा है। इस धंधे में हर तरह की गंदगी को नज़र अंदाज किया जाता है। इस पाक कारोबार में हर तरह का धन उज्ज्वल होता है

किताबें दुनिया की खिड़की

किताबें दुनिया की खिड़की

1 2011/01/24 9:18 pm

पुस्तकें अपनी पहचान और महत्व को खोती जा रहीं हैं । पढ़ने की संस्कृति विलुप्त हो रही है । फिर दौड़भाग भरी जिंदगी में टीवी, इंटरनेट, फेसबुक और ईबुक जैसे माध्यमों ने किताबों की प्रासंगिकता को खत्म कर दिया है।

सुनहरे भविष्य का मार्ग

सुनहरे भविष्य का मार्ग

1 2010/12/26 4:17 pm

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कभी कश्मीर भी कुछ और था

कभी कश्मीर भी कुछ और था

2 2010/02/16 9:37 pm

कश्मीर आज भले ही आतंकवाद, अलगाववाद, धार्मिक कट्टरता के कारण दुनिया के सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक माना जाता है। यहां की वादियां भले ही आज खून से लाल है, लेकिन इतिहास सदा से ही कश्मीर की गौरवशाली गाथा