Articles By: माणिक जी माणिक जी

संस्कृति के चाहने वाले के लिए अनोखा आयोजन  कटक में

संस्कृति के चाहने वाले के लिए अनोखा आयोजन कटक में

0 2011/04/17 8:37 pm

स्पिक मैके के 34 वें राष्ट्रीय अधिवेशन रावेनशॉ विश्वविद्यालय,कटक में एक ऐसे समय पर जब देश के अधिकतर छात्र अपनी गर्मी की छुट्टियों का आनंद ले रहे होंगे, स्पिक मैके   के  राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने वाले उन 1500

‘अम्बेडकर को कई मायनों में महात्मा गांधी से भी बडा मानता हूं’-डॉ. एस.एन.व्यास

‘अम्बेडकर को कई मायनों में महात्मा गांधी से भी बडा मानता हूं’-डॉ. एस.एन.व्यास

0 2011/04/17 8:34 pm

चित्तौडगढ 14 अप्रैल 2011 प्रयास कार्यालय में अम्बेडकर जयन्ति के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में सर्वप्रथम संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को माल्यार्पण कर विचार विमर्श प्रारम्भ हुआ. प्रारम्भ में हिंदी साहित्य के समालोचक और कवि डॉ. एस.एन.व्यास ने विचार

अशोक जमनानी का उपन्यास ”छपाक-छपाक”

अशोक जमनानी का उपन्यास ”छपाक-छपाक”

0 2011/02/12 11:02 pm

होशंगाबाद के अशोक जमनानी जिन्हें उनकी कविताओं के साथ ही संस्कृतिकर्म के ज़रिए तो जाना जाता भी है,मगर साथ ही पिछले कुछ सालों में उनके तीन उपन्यास भी पाठकों के बीच बहुत लोकप्रिय हुए हैं.उनकी सबसे प्रखर कृति व्यास गादी में उन्होंने आज

संस्मरण:-’कवन रंग मुँगवा, कवन रंग मोतिया, कवन रंग ननदी तोहरे बिरना’

संस्मरण:-’कवन रंग मुँगवा, कवन रंग मोतिया, कवन रंग ननदी तोहरे बिरना’

0 2010/10/28 10:55 am

बात लौटकर विरह पर आ ही जाती है, इसलिये बिरहा कहते हैं। कई उदाहरण दिये, कहा जब कृष्ण गोपियों को छोड़ द्वारका चले गये तो विरह हुआ। जब रोपनी गाते हुये महिलायें धान का बिरवा उखाड़ती हैं तो उस बिरवे का जमीन से अलग होना विरह है। ऊपर धूप में शरीर जल रहा है, विरह है। नीचे पानी में पाँव गल रहा है, वो विरह है, और झुककर धान रोपते-रोपते कमर टूटी जा रही है, वह भी विरह है।

”कविता का दौर खत्म हुआ लेकिन आज भी कविता सबसे अधिक लिखी जा रही है ”-युवा उपन्यासकार अशोक जमनानी

”कविता का दौर खत्म हुआ लेकिन आज भी कविता सबसे अधिक लिखी जा रही है ”-युवा उपन्यासकार अशोक जमनानी

2 2010/10/23 9:52 am

माणिक,होशंगाबाद,मध्यप्रदेश,युवा उपन्यासकार अशोक

बिरहा गायन सम्राट राम कैलाश यादव को श्रद्धांजलि

बिरहा गायन सम्राट राम कैलाश यादव को श्रद्धांजलि

0 2010/09/10 8:34 pm

देश का सांस्कृतिक छात्र आन्दोलन स्पिक मैके आने वाले बीस सितम्बर से दो अक्टूबर तक हाल ही चल बसे बिरहा गायन सम्राट राम कैलाश यादव को श्रृद्धांजली हेतु राजस्थान में कुछ कार्यक्रम करेगा.राम कैलाश जी जैसे वरिष्ठ लोकाकलाकर्मी का जाना

बिरहा का एक लोकप्रिय स्वर जाता रहा और आहट तक नहीं हुई !

बिरहा का एक लोकप्रिय स्वर जाता रहा और आहट तक नहीं हुई !

0 2010/09/09 6:49 pm

बात हो हल्ले की नहीं है मगर फिर कुछ तो आहट होनी थी उसके जाने पर जो उसके काम को बाकी दुनिया की तरफ से सही आदर हो सकता था.,मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं. गाँव के ठेठपन को आभास कराता

अम्मानुर माधव चाक्यार की यात्रा मार्गी आगे बढ़ाएंगे

अम्मानुर माधव चाक्यार की यात्रा मार्गी आगे बढ़ाएंगे

0 2010/09/04 7:42 pm

नवरस और पूतनावधम ने रंग भर डाले ”कुडीयट्टम नृत्य कोई एक शास्त्रीय नृत्य नहीं होकर अपने आप में एक ऐसा समन्वय है जिसमें दर्शक को नृत्य,संगीत,गीत के साथ ही मूकाभिनय और रंगमंच का समागम देखने को मिलता है.ये प्रस्तुतियां ताली

कवि हेमंत शेष को डॉ घासीराम वर्मा पुरस्कार

कवि हेमंत शेष को डॉ घासीराम वर्मा पुरस्कार

0 2010/08/31 2:51 am

प्रयास संस्थान की ओर से चूरू के नगरश्री सभागार में शनिवार शाम आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि एवं देश की शीर्षस्थ कथाकारों में शामिल नासिरा शर्मा ने कवि हेमंत शेष को डॉ घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार-2010 प्रदान किया। शेष को

चित्तौड़गढ़ में राजस्थानी कवि का सम्मान

चित्तौड़गढ़ में राजस्थानी कवि का सम्मान

0 2010/08/16 7:35 pm

महाराज शिवदान सिंह का एकल काव्य पाठ मेवाड़ के बहुत गहरी समझ वाले राजस्थानी के सादे विचारों वाले साहित्यकार महाराज शिवदान सिंह के दोहों को लेकर चित्तौडगढ में सेंथी स्तिथ डॉ. सत्यनारायण व्यास के निवास स्थान पर पंद्रह अगस्त की