Articles By: अनिकेत प्रियदर्शी अनिकेत प्रियदर्शी

बेरहम सरकार और बेहाल जनता

बेरहम सरकार और बेहाल जनता

0 2011/06/25 1:26 pm

डीजल के डंक और गैस में लगी आग ने आम जनता पर किया वज्रपात केन्द्र में बैठी कांग्रेस की सरकार ने फिर से आम जनता पर मंहगाई का वज्रपात कर दिया है। पेट्रोल, डीजल, क़िरोसिन और घरेलू इंधनो के मूल्य

परदे पर मुस्कुराने वाला राजकिरण

0 2011/06/03 1:17 pm

आंखो मे नमी हंसी लबों पर …क्या बात है क्या छुपा रहे हो? हिप हिप हुर्रे ,अर्थ तथा और भी कई फिल्मों मे अपने शानदार अभिनय से जीवंत करने वाले राजकिरण आज अमेरिका के एक मेंटल असाइलम मे अपनी जिंदगी

मीडिया को खतरा उसके अन्दर से ही है |

मीडिया को खतरा उसके अन्दर से ही है |

1 2011/05/29 9:25 pm

सूचना के माध्यम लोकतंत्र मे चौथे स्तम्भ माने जाते हैं और प्रत्येक नागरिक की इनसे अपेक्षा है कि उसे सही सूचना दें । संचार माध्यमों या समाचारपत्र की चतुर्थ सत्ता संज्ञा की सार्थकता तभी है जब वे सत्य की सूचना

सरकारी बदइन्तेजामी से परेशान छात्र

सरकारी बदइन्तेजामी से परेशान छात्र

0 2011/05/29 3:49 pm

मुंगेर में जिला मुख्यालय स्थित जिला स्कूल केंद्र पर हो रहे शिक्षक पात्रता परीक्षा फार्म की बिक्री के दौरान अभ्यर्थियों ने जमकर बवाल काटा। आक्रोशित अभ्यर्थियों ने फार्म बिक्री केंद्र पर पथराव किया, जिससे केंद्र पर अफरातफरी मच गयी। पथराव

जुनून क्रिकेट का …..

जुनून क्रिकेट का …..

0 2011/04/01 9:04 pm

रात के ग्यारह बज रहे थे और शोर इतना ज्यादा हो रहा था मानो पूरा भारत चिल्ला कर अपनी धडकनों को सामान्य करने का प्रयास कर रहा हो । इस नजारे को देखने के बाद ये समझा जा सकता है

बुद्धू बक्सा या लफड़ा बक्सा

बुद्धू बक्सा या लफड़ा बक्सा

2 2011/01/15 7:21 pm

पहले बुद्धू बक्से के नाम से सुशोभित और आज लफडा बक्सा का पर्याय बन चुका हमारा टेलीविजन इस कदर पगला गया है कि अब वो किसी भी हद को पार करने मे संकोच नही करता । कभी ज्ञान का एक

आदर्शवाद की लम्बी-चौड़ी बातें

आदर्शवाद की लम्बी-चौड़ी बातें

1 2011/01/12 1:01 pm

आदर्शवाद की लम्बी-चौड़ी बातें बखानना किसी के लिए भी सरल है, पर जब उसे अपने जीवनक्रम मे उतारना पडे तो बहुत कठिन हो जाता है । आज बिहार की धरती पर एक हिला देने वाली घटना को अंजाम देकर रूपम

ये सियासत ही है

ये सियासत ही है

0 2010/10/20 7:05 am

क्या यह वही आपत्तिकालीन समय है, जिसमें आपत्ति धर्म का अर्थ है-सामान्य सुख-सुविधाओं की बात ताक पर रख देना और वह करने में जुट जाना जिसके लिए मनुष्य की गरिमा भरी अंतरात्मा पुकारती है। आजकल बिहार मे चुनावी माहौल को

अपना काम बनता और भांड मे जाये जनता

अपना काम बनता और भांड मे जाये जनता

0 2010/09/21 11:28 am

दौडा-दौडा भागा भागा सा….जी हां आज बिहार की राजनीति के हाल की चाल लगभग इसी तरह की हो चुकी है । चुनाव से पहले जितनी पैंतरेबाजी हो सकती है सब हो रही है । पुरातन मित्रों का मिलन हो रहा

बिहार में चुनावी समर का शंखनाद

बिहार में चुनावी समर का शंखनाद

0 2010/09/09 6:15 pm

बिहार मे चुनावी शंखनाद बज चुका है और अब हमारे नेतागण को एक बार फिर से जनता की अदालत मे पेश होना है । उसी जनता की अदालत मे जो उन्हे अपना प्रतिनिधि बनाकर लोकतंत्र के अखाडे मे भेजता है