सोमरस के विषय में कुछ निराकरण
3बहुत दिनों के पहले हमने सोमरस पर एक लेख लिखा था जिसमें कई वैदेशिक विद्वानों के मतों का उल्लेख तथा यथाशक्य उनका दुराग्रह खण्डन किया गया था । किन्तु पर्याप्त अध्ययन के अभाव में लेख पूर्णता को प्राप्त नहीं हुआ
बहुत दिनों के पहले हमने सोमरस पर एक लेख लिखा था जिसमें कई वैदेशिक विद्वानों के मतों का उल्लेख तथा यथाशक्य उनका दुराग्रह खण्डन किया गया था । किन्तु पर्याप्त अध्ययन के अभाव में लेख पूर्णता को प्राप्त नहीं हुआ
विदित हो कि आज का विज्ञान चिल्ला-चिल्ला कर घी को और सूर्य की किरणों को उर्जा का स्रोत कहता है ! और आज सभी लोग इस बात को स्वीकार करते भी हैं ! किन्तु लाखों वर्षों पहले यही तथ्य हमारे मनीषियों ने
।। सम्पूर्ण मन्त्र यहाँ देखें ।। संकेत – अग्ने यं ……………………………………………………….. इद्देवेषु गच्छति ।। (ऋग्वेद – 1/1/4) भावार्थ – हे अग्निदेव । आप जिस हिंसा रहित यज्ञ को चारों ओर से आवृत किये रहते हैं , वही यज्ञ देवताओं तक
।। मूल मन्त्र यहाँ देखें ।। आज के युग में भारतीय मेधा के प्रथम प्रदर्शन ‘वेद’ विद्या के प्रसार प्रचार की बहुत ही आवश्यकता है । वेदों के विषयों में पाश्चात्य व प्रार्च्य कतिपय विद्वानों द्वारा इतने भ्रामक तथ्य फैला
यूं ही ब्लाग्स को टटोलते हुए आज मै एक बडे ही प्यार ब्लाग पर पहुंच गया जहां श्रीमद्भगवद्गीता के विषय में एक लेख लिखा हुआ था । पढकर बहुत ही अच्छा लगा । पर उसी ब्लाग पर मैंने एक पोस्ट