सज़ा ए मौत : न सज़ा , न मौत
4अभी हाल ही में आए कुछ अहम फ़ैसलों में अपराधियों को मौत की सज़ा सुनाई गई । इससे पहले भी मौत की सज़ा मिले आरोपियों , जिनमें अजमल और अफ़ज़ल जैसे आतंकवादी भी हैं को फ़ांसी दिए जाने में हो
अभी हाल ही में आए कुछ अहम फ़ैसलों में अपराधियों को मौत की सज़ा सुनाई गई । इससे पहले भी मौत की सज़ा मिले आरोपियों , जिनमें अजमल और अफ़ज़ल जैसे आतंकवादी भी हैं को फ़ांसी दिए जाने में हो
आज भ्रष्टाचार अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच चुका है इसलिए जैसा कि कहा गया है कि जब पाप का घडा जब भर जाता है तो उसका चटकना तय हो जाता है । आज हर तरफ़ एक ही मुद्दा
राजधानी दिल्ली के खबरिया हलकों में इन दिनों फ़िर एक लडकी की लाश केंद्र में है । पुलिस , मीडिया और आम आदमी अपने ताने बाने बुन रहा है हालांकि मीडिया पुलिस के काम में से स्टोरी और आम आदमी
खबर :-वेलेंटाइन डे पर मॉल्स में चुने जाएंगे बेस्ट कपल नज़र :-बिल्कुल ..जगहे वही है जहां पर आपको बेस्टम बेस्ट कपल ..एकदम सफ़ल होता हुआ दिखाई देगा और टाईम तो जान के चुने हैं आप ओही खासमखास दिन । मॉल्स
महाराष्ट्र में एडिशनल कलेक्टर को जिंदा जलाने की प्रतिक्रिया ने , सरकार , व्यवस्था , राजनीति सबमें पनप और पैठ जमा चुके भ्रष्टाचार के प्रति पहले से ही आक्रोशित आम जनमानस में एक अजीब सी बेचैनी और उत्तेजना भर दी
पिछले दिनों अचानक दो फ़ैसलों ने अपनी ओर ध्यान खींचा । इसमे आश्चर्य और सुखद बात ये है कि एक फ़ैसला दिल्ली की अधीनस्थ अदालत का है तो दूसरा सर्वोच्च अदालत का किंतु दोनों ही मुकदमों में महिला अधिकारों पर
यूं तो इस देश में खिलाडियों की उपेक्षा का अपना एक अलग ही खेल के समानांतर ही एक इतिहास है , मगर जब देश के खिलाडी सबको चौंकाते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में या किसी बडे अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में पदकों
पिछले बीस दिनों से समाचार पत्रों पर जनता एक ही सुर्खियां पढती आ रही है कि गतिरोध जारी ..संसद आज भी नहीं चली । और पूरक खबर के रूप में जो खबर होती है कि आम जनता का फ़लाना ढिमकाना
पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से न्यायिक क्षेत्र में पनप रहे कदाचार व अन्य अनियमितताओं की खबरें आती रही हैं उसने एक बार फ़िर से इस चर्चा को गर्म कर दिया है कि क्या अब समय आ गया है