योगस्थ कुरू कर्माणि
0योगस्थ कुरू कर्माणि अर्थात् योग (समत्व) में स्थित होकर कार्य करो . “सफल परारथ है जग माहिं, कर्महीन नर पावत नाहीं ।” रामायण की अपरोक्त पंक्तियॉं हमें बताती है कि वह सब कुछ जिसकी हम इच्छा रखतें है, वह इस स्ष्टि
योगस्थ कुरू कर्माणि अर्थात् योग (समत्व) में स्थित होकर कार्य करो . “सफल परारथ है जग माहिं, कर्महीन नर पावत नाहीं ।” रामायण की अपरोक्त पंक्तियॉं हमें बताती है कि वह सब कुछ जिसकी हम इच्छा रखतें है, वह इस स्ष्टि
कई बार त्वचा में कई प्रकार के चर्म रोग भी खूबसूरती में दाग के समान होते है । सफेद दाग यह दूधिया सफेद रंग का दाग होता है । इसे ल्यूकोडर्म कहते है इसका इलाज काफी लंबा चलता है इसके