ऑनर किलिंग:इंसानियत पर धब्बा
0अभी हाल में ही मथुरा ऑनर किलिंग मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया,जिसमे आठ लोगों को फाँसी की सजा तथा सत्ताइस को उम्र कैद की सजा सुना दी। ये बात अलग है कि ये फैसला आते-आते २० साल
अभी हाल में ही मथुरा ऑनर किलिंग मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया,जिसमे आठ लोगों को फाँसी की सजा तथा सत्ताइस को उम्र कैद की सजा सुना दी। ये बात अलग है कि ये फैसला आते-आते २० साल
साक्षरता की कमी या यूँ कहे कि निरक्षरता हमारे देश की सबसे बड़ी व गंभीर समस्या है …आज भी गाँव-देहात की बात तो छोड़ दें ,शहरों में भी बच्चे स्कूल नहीं जाते या अगर गए भी तो कक्षा ५ के
तेज रफ़्तार आज के दौर की पहचान बन चुकी है। धीमे चलने वालों के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है, न ही उनकी कोई क़द्र है। और तेज़ रफ़्तार को ही अपनी जिन्दगी बनाने वाले कोई और नहीं है बल्कि
. जिस तेजी से परिवर्तन की बयार चल रही है….उसमे सब कुछ उतनी ही तेजी से बदल भी रहा है…हमारी जीवन शैली,हमारा आचरण,हमारे आदर्श,हमारे विचार,कर्त्तव्य, …सभी कुछ.हमारे उद्दयेश बदल गए हैं.पहले हम जिन उद्द्येश्यों की पूर्ती के लिए शिक्षा ग्रहण
लादेन मारा गया,आख़िरकार अमेरिका ने उसकी मौत पर अपनी मोहर लगा दी। जहाँ वो छिपा हुआ था मौत भी उसे वहीँ मिली। पाकिस्तान की सरजमीं जो उसकी पनाहगाह थी,उसकी कब्रगाह भी बनी।उसकी मौत के साथ आतंकवाद से जुड़ा एक
हिन्दू दिखाई दे न मुसलमाँ दिखाई दे आँखे तरस रही है कि इंसा दिखाई दे। क्या जिंदगी है नाम इसी का ज़माने में हर शख्स जिन्दगी से गुजरा दिखाई दे। धर्म,जात,साम्प्रदायिकता विशेष पहचान है हमारे देश की और इनकी खातिरइंसानियत का दुश्मन बन जाना हमारा अधिकार भी है और कर्त्तव्य भी। जब देश में कोई आतंकी हमला हो
हमारे देश में कई शहर ऐसे है,जिनकी पहचान या तो वहां पैदा होने वाली चीजों से होती है या फिर वहां के उद्दयोग-धंधो से होती है.जैसे लखनऊ अपनी चिकिनकारी,अलीगढ ताला उद्दयोग,मेरठ कैंची व खेल का सामान बनाने के लिए मुरादाबाद
जीवन एक सपूर्ण पाठशाला है…इस बात से हम और आप इंकार नहीं कर सकते क्योकि इस पाठशाला में हमें रोज कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। जिन्दगी आपको हर रोज एक नया अनुभव कराती है,,जो आगे चलकर आपके जीवन
बहुत दिनों से किसी फिल्म के बारे में कुछ नहीं लिखा,क्योंकि काफी टाइम से कोई फिल्म देखी भी नहीं थी,अभी ३-४ दिन पहले सलमान खान की दबंग देखी,फिल्म मुझे पसंद आयी और फिर सोचा कि अपनी लेखनी को इस तरफ
पत्रकारिता ने हमेशा से ही मुझे अपनी ओर आकर्षित किया और मैंने एक पत्रकार बनने का सपना अपनी आँखों में सजाया। बस अपने इस सपने को पूरा करने के लिए मैंने एम.जे.पी रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली में पत्रकारिता के कोर्स में