प्रेरक-कथा|2011/05/11 5:38 pm

विदूषित भाषा के स्वरूप

 

विदुर जब श्री क्रष्ण का सँदेश लेकर गोपियों के पास आये और जैसा श्री क्रष्ण ने कहने और करने को कहा था, वही किया, पर क्या हुआ ?  गोपियों का अनूप प्रेम देखकर उन्हें जब समझाने लगे तो जवाब में उन्हें सुनने को मिला ” आपको जो कहना था कह दिया, अब भाषण का समय हो गया है, हम जो है वही है प्रेम में क्रष्ण बनी हुई राधाएँ, यही जाकर उनसे कहना.”

देवी नागरानी

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