
जीवन दो विपरीत शक्तियों का संघर्ष है . जहाँ दो लोग आपस में मिलते हैं ,वहीँ दोनों शक्तियां मिलती है . और जब ये दो शक्तियां करीब आती हैं तो उपद्रव होता है क्योंकि दोनों भिन्न हैं .
एक समय , मुल्ला नसरुद्दीन घर में बैठा था .उसका सबसे छोटा बच्चा मुल्ला रमजू इतिहास की किताब पढ़ रहा था . अचानक उसको कुछ सुझा और जिज्ञासा भरे नैनों से उसने पूछा ," अब्बा युद्धों का वर्णन है मेरी किताब में ………. ये युद्ध शुरू कैसे होते हैं ? "
मुल्ला नसरुद्दीन ने जबाव दिया , " समझो पाकिस्तान ने हमला कर दिया है . मान लो ……………………………………."
यूँ सुनते हीं चौके से बेगम साहिबा दहाड़ उठी ," अजी यह क्या बात हुई ? पाकिस्तान कभी हिन्दुस्तान पर हमला कर ही नहीं सकता "
मुल्ला नसरुद्दीन बोले – वह तो मैं भी जानता हूँ पाकिस्तान की इतनी औकात नहीं है कि वो हमारे हिन्दुस्तान पर हमला करने की जुर्रत कर सके . परन्तु मैं तो मिसाल दे रहा था फर्ज करो कि …………………….
बेगम बोली- नहीं , नहीं पाकिस्तान एक अमनपरस्त इस्लामी देश है . वह किसी पर हमला कर ही नहीं सकता !
मुल्ला चौंका . उसने कहा अरे , मैंने कब कहा वह जंग कर रहा है ……… बस ऐसे ही सपोज करो ………..मान लो ……………
बेगम का पारा सातवें आसमान जा पहुंचा . वह बोल पड़ी – क्यूँ मानु ? जो हो नहीं सकती उसे क्यों मानूं , हाँ . तुम गलत राजनीति बच्चे के मन में डाल रहे हो . तुम पाकिस्तान विरोधी तो थे हीं अब लगता है इस्लाम से भी तुम्हारा कोई नाता नहीं रह गया . . मेरे लड़के के मन में गलत राजनीति डाल रहे हो ऐसा मैं होने नहीं दूंगी .
इतना कहकर वह गुस्से से कसमसाती बेलन लिए रसोई से बाहर निकल आई . उसे बेलन लिए देख मुल्ला नसरुद्दीन को भी जोश आ गया और उसने भी अपनी लाठी उठा ली . तभी उस छोटे से बच्चे रमजू ने कहा ," अब्बा ,अम्मी रुक जाओ ….. मैं समझ गया युद्ध कैसे होते हैं .अब कुछ और कहने की जरुरत नहीं है ."

