अपने अज्ञातवास के अंतिम समय में अर्जुन ने विराटनगर,नेपाल के राजा की गायो के हरण कर चुके कौरवो से जिस जगह युद्ध कर रक्षा की वो जगह ही गो रक्षा पुर या गोरखपुर कहलाई. अर्जुन की तरह ही आज भी
भारत की भूमि पर ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ अर्थात समस्त विश्व मेरा परिवार है जैसे विचार प्रगट हुए। जो आजकल निजि पारिवारिक सुत्रों में बंध चुके है। वैसा भी घिनौनी सत्ताहडपनिति करने वाले नेताओं से आशा छोड़कर स्वयं आगे बढों। हिंदी का श्राद्ध दिवस मनाना छोड़ों प्रतिपल हिंदी में जीना सीखों। तभी ये भारत विश्व पर राज करेगा। नही तो ये वर्तमान नेता भारत के स्वाभिमान को बेच देंगे। आओ हम सब अपना दायित्व निभाए भारत को विश्वगुरू ही नही वरन् ब्रह्माण्ड गुरू बनाये।
भारत की भूमि पर ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ अर्थात समस्त विश्व मेरा परिवार है जैसे विचार प्रगट हुए। जो आजकल निजि पारिवारिक सुत्रों में बंध चुके है। वैसा भी घिनौनी सत्ताहडपनिति करने वाले नेताओं से आशा छोड़कर स्वयं आगे बढों। हिंदी का श्राद्ध दिवस मनाना छोड़ों प्रतिपल हिंदी में जीना सीखों। तभी ये भारत विश्व पर राज करेगा। नही तो ये वर्तमान नेता भारत के स्वाभिमान को बेच देंगे। आओ हम सब अपना दायित्व निभाए भारत को विश्वगुरू ही नही वरन् ब्रह्माण्ड गुरू बनाये।
भारत की भूमि पर ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ अर्थात समस्त विश्व मेरा परिवार है जैसे विचार प्रगट हुए। जो आजकल निजि पारिवारिक सुत्रों में बंध चुके है। वैसा भी घिनौनी सत्ताहडपनिति करने वाले नेताओं से आशा छोड़कर स्वयं आगे बढों। हिंदी का श्राद्ध दिवस मनाना छोड़ों प्रतिपल हिंदी में जीना सीखों। तभी ये भारत विश्व पर राज करेगा। नही तो ये वर्तमान नेता भारत के स्वाभिमान को बेच देंगे। आओ हम सब अपना दायित्व निभाए भारत को विश्वगुरू ही नही वरन् ब्रह्माण्ड गुरू बनाये।
भारत की भूमि पर ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ अर्थात समस्त विश्व मेरा परिवार है जैसे विचार प्रगट हुए। जो आजकल निजि पारिवारिक सुत्रों में बंध चुके है। वैसा भी घिनौनी सत्ताहडपनिति करने वाले नेताओं से आशा छोड़कर स्वयं आगे बढों। हिंदी का श्राद्ध दिवस मनाना छोड़ों प्रतिपल हिंदी में जीना सीखों। तभी ये भारत विश्व पर राज करेगा। नही तो ये वर्तमान नेता भारत के स्वाभिमान को बेच देंगे। आओ हम सब अपना दायित्व निभाए भारत को विश्वगुरू ही नही वरन् ब्रह्माण्ड गुरू बनाये।
bhu.tyagi.bhartiya@gmail.com, bhubhawnabhartiya@gmail http://www.mahilaparivar.blogspot.com