हिंदी-एक नजर

बचा रहे इस देह में , स्वाभिमान का अंश .
रखो बचाकर इसीलिए , निज भाषा का दंश ..
कथा-कहानी ,लोरियां ,थपकी, लाड-दुलार.
अपनी भाषा के सिवा और कहाँ ये प्यार..
निज भाषा ,निज देश पर’ रहा जिन्हें अभिमान.
गए हरदम वक़्त ने उनके ही जयगान..
हिंदी से जिनको मिला ,पद-पैसा सम्मान.
हिंदी उनके वास्ते मस्ती का सामान ..
सम्मलेन,संगोष्टियां,पुरस्कार,पदनाम.
हिंदी के हिस्से यही धोखे,दर्द तमाम..
हिंदी की उंगली पकड़,जो पंहुचे दरबार.
हिंदी के पर नोचते ,बनकर वे सरकार..
अंग्रेजी पर गर्व क्यूँ,क्यों हिंदी पर शर्म.
सोचो इसके मायने,सोचो इसका मर्म..
दफ्तर से दरबार तक,खून सभी का सर्द.
किससे जाकर कहे ,हिंदी अपना दर्द..

  • Share this post:
  • Facebook
  • Twitter
  • Delicious
  • Digg

3 Comments

  • Hindi ab na kare vilaap
    angrezi ke channel ko bhi
    ab hai Hindi ki darkar
    Gar phunchana chahate hain
    sabke dar aur ghar-baar.
    Neelesh Jain
    yoursaarathi.blogspot.com

  • स्पीच हुआ था परसों ही

    इंग्लिश मे बोले मंत्रीजी,हिन्दी को अपनाना होगा, तब जीतेंगे हारी बाजी। जब हिन्दी के प्रचार के लिये भी अंग्रेजी में भाषण दिये जाते हों तो इन झूठे हिन्दी प्रेमियों से क्या आशा रखी जाय।

  • महाशय, ये तो मंत्रीजी ही बोले न, आपको पता है वर्तमान राष्ट्रपति माननीय महोदया श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने तो हिंदी दिवस के शुभ-अवसर पर हिंदी के रचनाकारों को सम्मानित करते हुवे अंग्रेजी में बहुत ही खुबसूरत भाषण दिया था….

    उन्होंने अपने कार्यकाल की शुरुवात ही इतिहास बना कर किया था..

    “” हिंदी करे अब किसपे भरोसा ,
    जहाँ से भी थी आस वहां से मिली धोखा”"……

    आगे पढिये इसी कविता के शेष भाग को, इसी श्रेणी में मैं आज पोस्ट कर रहा हूँ……..
    बहुत-बहुत धन्यबाद जी आपका, आगे भी आपके टिपण्णी का इन्तेजार रहेगा,,,,,,,,

Leave a Reply