कविता|2011/09/05 7:00 pm

लिए तिरंगा हाथ में उमड़ा है जन-ज्वार

बापू सुनिए देष का प्रादेषिक समाचार

लिए तिरंगा हाथ में उमड़ा है जन-ज्वार

सबको बराबर न्याय मिले छिने न मुँह का कौर

अन्ना जी संग लगा रहे हैं भारतवासी दौड़

अन्नाजी के मन में उबला है अदभुत उत्साह

ड्रामेबाज अमर सिंह को होती इनसे डाह।

अन्नाजी अनषन करें बाबा करें बबाल

पी0 चिदम्बरम को लगे इसमें विदेषी चाल अन्ना,

बाबा पर ओछे दिग्विजय के व्यान

लालूजी भी अन्ना पर लिए हैं लाठी तान।

अन्ना बैठे मंच पर लगी बापू की तस्वीर

नीचे जन- सैलाब लिख रहा भारत की तकदीर।

रामलीला मैदान में एकजुट है जनता

आज ही जनमत हो जाए है किसमें कितनी क्षमता।

मनमोहन लाचार हैं हालत डावाॅडोल

काँगरेस सरकार का होगा गरदमगोल।

एक तरफ सरकार है टीम अन्ना एक ओर

न्यायालय के हाथ है अब दोनों की डोर

रामदेव, अन्ना – प्रकरण पर बोले जेठमलानी

योर आॅनर, कपिल सिब्बल को भेजें कालापानी

सोनियाँ जी के चेहरे पर हैं इन्तमिनान के भाव

राहुल को चिंता नहीं है दिल्ली दूर चुनाव।

षरद -नीतीष को आ गयी आपातकाल की याद

अन्ना की आँधी में भूलो मत कोसी की बाढ़

चैकन्ना विपक्ष रख रहा फूँक – फँूक कर पैर

लोकतंत्र के मालिक से भला कौन ले बैर

लोकपाल, जनलोकपाल के प्रारूप का पेंच

फँसा कर जनता के लिए मत धूप में रोटी सेक

काॅगरेस ने काला कर लिया इतिहास का पन्ना

देष – प्रेम में जेल पहुँच गए गाँधीबादी अन्ना

दिल्ली पुलिस चाहे भाँजे सत्याग्रहो पर डंडा

झुकने नहीं देना तिरंगा देषभक्ति का झंडा।

सदा के लिए भ्रश्टाचार भारत को दे छोड़

ये सपना जो देखे उसके मन में नाचे मोर।

 

संतोश कुमार, मधेपुरा बिहारमो0 9334984895    8434301695

 

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