
आकाश तिवारी
बाप रे बाप ऐसी मंहगाई
जियेंगे कैसे भाई?
कार से लेकर किचन तक मंहगाई मार गई
चूल्हे पर खाना पकाओं, साइकिल खरीद लो भाई
पहले क्या कम थी मंहगाई
जो और बढ़ा दी शिला ताई
जीने दोगे तो जीने दो वरना
मौत दे दो दिल्ली की माई
इस मंहगाई की मार से
पूछो मेरे परिवार से
पहले सिर्फ मैं कमाता
पूरा परिवार आराम से खाता था
अब मै और मेरी बीबी
दोनों कमाते है
फिर भी एक ही टाइम खाते है
इस महंगाई मै बचे रोज करते है परेसान
पापा ये ला दो वो ला दो
कहाँ से लाऊ उनका सामान
अब तो बच्चे भी समझ गये महंगाई की मार
कहते है दो वक्त का खाना ही मिल जाये
यही है भगवान से गुहार
इस महंगाई ने ऐसा रुलाया है
पूरा हिंदुस्तान सदमे मै आया है
मौत बनके आई है महंगाई
अब तो रहम करो,
हां रहम करो दिल्ली की माई

