मधुमेह आया, या हमने बुलाया?

नियम सृष्टि के तोड़ रहें हैं
नियमित कुछ न छोड़ रहें हैं
बिल्डिंगों के अट्टाहास में वृक्षों की कराह दब गयी है
आधुनिकीकरण के पैमानों से मेहनत तो जैसे थक गयी है
टीवी पतले हो रहे है और देखने वाले मोटे
बर्गर पिज्जा के बोझ तले, फलफूल हो गए हैं छोटे
कसरत से नाता तोड़ दिया, पैदल चलना भी छोड़ दिया
समयचक्र के नियमों को बेरहमी से तोड़ दिया
 
रचनात्मकता तो जैसे लैपटॉप की बटनों में कहीं खो गयी है
धरती अब हमारी कम, मशीनों की ज्यादा हो गयी है
स्वास्थ्य पर मधुमेह की नज़र तो एक इशारा है
मेटाबोलिक सिंड्रोम और रक्तचाप का हमला और भी करारा है
अब तो लड़ना ही होगा, आइये शुरुआत करें
आगाज़ करें, विश्वास करें, इस दानव को बर्बाद करें
आइये साथ चले, साथ बड़े, और मधुमेह से लड़ें
अपनी प्रकृति को फिर से पायें और एक नवयुग का निर्माण करें
अपनी प्रकृति को फिर से पायें और एक नवयुग का निर्माण करें
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