कालाधन? नही.. नीयत का कालापन हूँ मैं

कालाधनकहते है लोग काला हूँ मैं!

न काला रंग है मेरा

न काला मन मेरा

न काले कर्म है मेरे

न इरादों मे कालापन है

क्यूं कहते है लोग काला हूँ मैं?

किसी की जरूरत हूं

तो किसी की शान हूँ,

मेरी नजर छोटा तू, न वो बड़ा

तेरी हूं लक्ष्मी, तो उसका भी मेहमान,

देश की रगो का बहता लहू हूं

बहने दे मुझे, यूं दबाके रोक गठरी में

क्यूं कहते हो काला हूं मैं?

कहते है लोग काला हूँ मैं!

कसूर मेरा क्या है?

कमीं तो है हम दोनों के रिस्ते में

मैं तो एक सिक्के के दो पहलूं हूं बस

ईमानदारी से कमाया तो खून-पसीना

जहां बेईमानी तेरी वहां ‘कालाधन’ हूं मैं!

बस अब तुझे समझना होगा, मानना होगा

काला मेरा रंग नहीं, तेरी नीयत का कालापन हूं मैं।


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