नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के साथी “क्रांतिकारी मोहन लहरी” नहीं रहे

राजीव रंजन प्रसाद अभी अभी यह दु:खद सूचना मिली है कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के साथी “क्रांतिकारी मोहन लहरी” नहीं रहे। श्री मोहन लहरी जी का जन्म 1908 को होशंगाबाद में हुआ था तथा 104 वर्ष की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा के पश्चात कांकेर (बस्तर) के एक गेस्ट हाउस में 29 अगस्त 2012 की मध्य रात्रि को उन्होंने आखिरी सांस ली। श्री मोहन लहरी के साथ आज उस जीवित इतिहास का अंत हो गया जो भारतीय स्वतंत्रता के →आगे पढ़ें ..

चेन्नई के अस्पताल में चूहे का भोजन बना ‘नवजात’

प्रीति सक्सेना चेन्नई (साई)। यहां के एक एक सरकारी अस्पताल में नवजात के गाल और कान को चूहों के अपना भोजन बना लिया। इस तरह नोच खाने के मामले में 2 डॉक्टरों समेत 9 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है। पिछले दिनों सरकारी अस्पताल में चूहों द्वारा एक नवजात को नोचने का मामला सामने आने से सनसनी फैल गई थी। इस मामले में मुख्यमंत्री जयललिता ने हेल्थ मिनिस्टर, फाइनैंस मिनिस्टर और सीनियर ऑफिसर्स के साथ →आगे पढ़ें ..

बिहार में लौट रहा है ‘ जंगलराज ‘

मित्रों,अभी तक जिस तरह की घटनाएँ दिल्ली और मुम्बई में ही ज्यादा देखने को मिलती थी न जाने कैसे और क्यों अब बिहार में भी देखने को मिल रही हैं। बिहार में पिछले कुछ महीनों से महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। अगर आपके साथ कोई स्त्री है और आप बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर चहलकदमी कर रहे हैं तो सचेत रहिए आपके साथ कभी भी कुछ भी हो सकता है। अभी कल ही पटना →आगे पढ़ें ..

बाल श्रम प्रतिबंधित मगर इससे जुड़े दूसरे पक्ष का क्या..?

अब किसी चाय के ठेले पर छोटू नहीं दिखेगा या कोई बच्चा आपकी गाड़ी की सफाई नहीं करेगा| दरअसल केंद्र सरकार ने चौदह साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध को हरी झंडी दे दी है। ऐसा करने वाले को अब अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है जबकि ५० हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है| प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी →आगे पढ़ें ..

दलित हित के बगैर सामाजिक समरसता असंभव

दलितों पर अत्याचार कोई नई बात नहीं है. आए दिन ऐसी घटनाएँ पढने/ सुनने  को मिलती रहती है की दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढने दिया गया, इसके अतिरिक्त नाबालिग दलित बालिकाओं के साथ छेड़छाड़ या बलात्कार की घटनाएँ भी होती रहती है . इस तरह की घटनाओं पर तब तक अंकुश नहीं लग सकता जब तक की समाज की दलित समुदाय के प्रति मानसिकता नहीं बदलती . पढाई  लिखाई से अनुसूचित जाति समाज में जाग्रति आई है , पहले जहाँ →आगे पढ़ें ..

संवेदनाओं की मौत दिखा गए हंगल साहब

स्व.अवतार किशन उर्फ़ एके हंगल की मौत से रुपहले परदे पर जो सन्नाटा पसरा है उसके पीछे का स्याह पक्ष और भी काला है| 50 वर्षों तक रुपहले परदे पर अपनी अदाकारी का जादू बिखेरते रहे हंगल साब की ज़िन्दगी के आखिरी दिन मुफलिसी में तो बीते ही, उनकी मौत के बाद उनको कंधा देने भी सिने जगत के दिग्गजों की दूरी परदे की दुनिया के परदे के पीछे की सच्चाई बयां कर रही है| मूल रूप से रंगमंच के कलाकार हंगल साब का तन-मन →आगे पढ़ें ..

ग्रीनपीस ने जारी किया इनेबलिंग क्लीन टॉकिंग रिपोर्ट

नई दिल्ली 28 अगस्त: देश के दूरसंचार क्षेत्र में इस्तेमाल किये जा रहे डीजल के उपयोग को खत्म करने के लिए ग्रीनपीस निरंतर सक्रिय है. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए ग्रीनपीस ने “इनेबलिंग क्लीन टॉकिंग” नामक रिपोर्ट के द्वारा एक ऐसे रोडमैप को दूरसंचार क्षेत्र के सामने रखा है जिसका उपयोग करने पर दूरसंचार कंपनियां न केवल आर्थिक रूप से लाभ में रहेंगी बल्कि पर्याववरण की सुरक्षा भी होगी. इस रिपोर्ट →आगे पढ़ें ..

बंग्लादेशी घुसपैठिए और सेकुलर भारतीय (कविता)

सारे सेकुलर चुप बैठे हैं, देश जल रहा जलने दो। बंग्लादेशी वोटर अपने, असम मे इनको रहने दो॥ अरबों की आबादी अपनी, उसपर भी सीमित संसाधन। फिर भी हम खुश होकर करते, बंग्लादेशी का अभिनंदन॥ हिंदुस्तान है चारागाह, इनको भी कुछ चरने दो। सारे सेकुलर चुप………………………………………… जगह जगह ये बम फोड़ें, हर देशद्रोह का काम करें। कट्टरपंथी इनकी खातिर, हर चौराहा जाम करें॥ हिंसक होकर आग लगाएँ, शहीदों का अपमान →आगे पढ़ें ..

फिल्म पत्रकारिता, पीआर पत्रकारिता नहीं – अजय ब्रह्मात्मज

मुंबई से संगीता ठाकुर की रिपोर्ट मुंबई. फिल्म के पत्रकार फ़िल्मी सितारों से सवाल करते हैं और वे उनका जबाव देते हैं. लेकिन मुबई प्रेस क्लब में 'फिल्म पत्रकारिता या पीआर पत्रकारिता' पर परिचर्चा के दौरान मामला उलटा था. फ़िल्मी दुनिया की खबर पहुँचाने वाले पत्रकार वक्ता के रूप में थे. उनसे सवाल पूछे जा रहे थे और बीच में कोई पीआरओ नहीं था. गरमागरम बहस हुई और कुछ स्वीकारोक्तियां भी. फिल्म पत्रकारों →आगे पढ़ें ..

देशहित में घोटाला !

मित्रों,बात बहुत पुरानी है मेरे जन्म के समय की लेकिन क्या करूँ देशहित में हम अपने मन में दबाए हुए थे। दरअसल इससे पहले देश की हालत कुछ अच्छी नहीं थी। कोई भी काम देशहित में नहीं हो रहा था। अब चूँकि देश में प्रत्येक काम देशहित में हो रहा है यहाँ तक कि घोटाले-महाघोटाले भी देशहित में हो रहे हैं इसलिए मैंने भी सोंचा कि चलिए अब भेद खोल ही देते हैं। दरअसल बात यह है कि जब मेरा जन्म हुआ तब पंडित →आगे पढ़ें ..

हरदिल अजीज थे शोले के इमाम साहब यानि ए. के. हंगल

दीपक अग्रवाल अवतार किशन हंगल, यानी ए. के. हंगल को रूपहले पर्दे पर देखकर लोगों को अहसास होता था कि यह सूरत उनके आसपास की ही है। हंगल में आम आदमी अपने आप को पाता था। निम्न मध्य वर्गीय परिवार के दृश्यों में जब हंगल साहेब पायजामा या धोती पहनकर घर के अंदर होते तो लगता मानो पड़ोसी का ही घर हो। एक छाता टांगे आफिस के बड़े बाबू के रोल में वे बेहद जंचते। हंगल के पास कभी स्टार का रुतबा नहीं रहा। वह हीरो →आगे पढ़ें ..

दिल्ली में एक दर्जन बच्चे रोज हो रहे गायब

रश्मि सिन्हा देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा में पुलिस पूरी तरह नाकाम ही साबित हो रही है। शीला दीक्षित के राज में दिल्ली में हालत यह है कि इस शहर से रोजाना एक दर्जन से ज्यादा बच्चे लापता हो रहे हैं। पुलिस प्रशासन और सांसद विधायक भी इस मामले में मोन ही साधे हुए हैं। दिल्ली में औसतन 12 बच्चे रोजाना लापता हो जाते हैं जिनमें लड़कियों की संख्या अधिक होती है। आधिकारिक →आगे पढ़ें ..

कभी सोचा है,बीस साल बाद क्या खाएंगे ?

कीड़े- मकोड़ों की 1400 प्रजातियों को इंसान खा सकता है। हालांकि नई बात नही है। आज भी कीडे़ भोजन का एक हिस्सा है। विदेशों मे चाव से खाये जाते है। आफ्रीका में टिड्डे तो जापानी ततैयों को मजे से खाते हैं। सवाल टेढ़ा है। समय भी बहुत है। बीस साल आते तक पता नही क्या होगा। कितनों का ठिकाना बदल जायेगा। कुछ इस दुनिया मे रहेंगे। कई पता नही कहां रहेंगे। इतना जरूर है, जहां भी रहेंगे खाना खाएंगे। सवाल →आगे पढ़ें ..

देश को अराजकता की ओर धकेलती वोट नीति

धर्म के आधार पर हिन्दुस्तान, भारत और पाकिस्तान के रूप में देश विभाजन की भीषण त्रासदी को पहले ही झेल चुका है। 65 वर्षों के बाद भी आज याद मात्र से ही शरीर में सिरहन दौड़ जाती है, आदमी भयभीत हो जाता है। यूं तो इतिहास होता ही सबक लेने के लिए, सीख ले आगे ऐसे रास्ते पर न चलने के लिए, ऐसी घटनाओं से बचने के लिए लेकिन इन 65 वर्षों में अब ऐसा लगने लगा है कि भारत के जनप्रतिनिधियों ने इससे कोई भी सबक नहीं लिया →आगे पढ़ें ..

मेरी खामोशी न जाने कितने सवालों की आबरू रखती है!

संसद के दोनों सदनों में कोल आवंटन ब्लॉक घोटाला मामले में गतिरोध समाप्त होते न देख प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष के भारी हंगामे के बीच प्रश्नकाल के बाद लोकसभा में अपना बयान दिया। दरअसल प्रधानमंत्री आज से ईरान के दौरे पर जा रहे हैं इसलिए जाने से पहले वह इस मामले पर अपनी सफाई देना चाहते थे। हालांकि शोर-शराबे के बीच उनका बयान दब गया किन्तु सूत्रों के अनुसार उन्होंने कोयला आवंटन पर →आगे पढ़ें ..

एस.पी.सिंह स्मृति समारोह मुंबई में संपन्न

दिल्ली हो या मुंबई आधुनिक भारतीय पत्रकारिता के महानायक और हिंदी न्यूज़ चैनल 'आजतक' के संस्थापक संपादक सुरेंद्र प्रताप सिंह यानी एस.पी सिंह को चाहने वाले और मानने वाले हर जगह है. एस.पी.सिंह स्मृति समारोह मुंबई में आयोजित किया गया तो यहाँ भी उनके चाहने वाले और साथ काम कर चुके पत्रकार पहुंचें. उनसे जुडी यादों को बांटा. उन्हें याद किया और भावुक भी हुए. वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सचदेव ने एस.पी →आगे पढ़ें ..

अफवाहों की आड़ में छीनी जा रही है बोलने की आज़ादी

भारत एक लोकतान्त्रिक देश है. लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाने में हम बहुत ही सौभाग्यशाली रहे क्योंकि हमें लोकतंत्र अपनाने के लिए विश्व के अन्य देशों की तरह संघर्ष नहीं करना पड़ा. 1947 में प्राप्त स्वतंत्रता पश्चात हमारी संविधान सभा ने जिस संविधान को अंगीकार किया उसी संविधान द्वारा यहाँ के नागरिको को प्रदत्त मूल अधिकारों में से एक अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी सम्मिलित →आगे पढ़ें ..

खतरे में है बोलने की आजादी

मित्रों,मुझे ज्वलंत मुद्दों पर लिखने का शौक तभी से है जबसे मैं पत्रकारिता के क्षेत्र में आया। वर्ष 2007 के 1 सितंबर को जब मैंने पटना,हिन्दुस्तान ज्वाइन किया उससे पहले ही मेरे कई आलेख भोपाल और नोएडा के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके थे। हिन्दुस्तान में भी कोशिश की लेकिन मेरे जैसे प्रशिक्षु पत्रकार को कहाँ इस विशालकाय अखबार में स्थान मिलनेवाला था? मन कचोटता,मन में नए-नए विचार →आगे पढ़ें ..

घुसपैठिये ही लगा रहे हैं असम में हिंसा की आग

जयकृष्ण गौड़ राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्ला का बयान ना केवल सच्चाई से परे है बल्कि इसमें अलगाववादी साजिश की पृष्ठभूमि दिखाई देती है कि इस बार लड़ाई बंगलादेशी और बोडो के बीच में नहीं थी बल्कि यह संघर्ष बोडो और बोडलैंड टेरिटोरियल आटोनोमस डिस्ट्रिक में रहने वाले मुस्लिमों के बीच है | आयोग ने सरकार को प्रस्तुत रिपोर्ट में स्वीकार किया कि असम में कुछ घुसपैठ हो रहती →आगे पढ़ें ..

शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य …

प्राचीन समय से भारत की शिक्षा पद्धति का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील,वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें. किन्तु भारतीय शिक्षा पद्दति अपने इस उद्देश्य मे पूर्ण सफलता नही प्राप्त कर सकी है | आधुनिक युग के माता पिता भी बच्चों को स्कूल के भरोसे छोड़कर अपने कर्तव्यों को पूरा समझ बैठते हैं , पारिवारिक शिक्षा का तो आधुनिक →आगे पढ़ें ..