राजीव रंजन प्रसाद
अभी अभी यह दु:खद सूचना मिली है कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के साथी “क्रांतिकारी मोहन लहरी” नहीं रहे। श्री मोहन लहरी जी का जन्म 1908 को होशंगाबाद में हुआ था तथा 104 वर्ष की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा के पश्चात कांकेर (बस्तर) के एक गेस्ट हाउस में 29 अगस्त 2012 की मध्य रात्रि को उन्होंने आखिरी सांस ली। श्री मोहन लहरी के साथ आज उस जीवित इतिहास का अंत हो गया जो भारतीय स्वतंत्रता के →आगे पढ़ें .. नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के साथी “क्रांतिकारी मोहन लहरी” नहीं रहे
राजीव रंजन प्रसाद
अभी अभी यह दु:खद सूचना मिली है कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के साथी “क्रांतिकारी मोहन लहरी” नहीं रहे। श्री मोहन लहरी जी का जन्म 1908 को होशंगाबाद में हुआ था तथा 104 वर्ष की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा के पश्चात कांकेर (बस्तर) के एक गेस्ट हाउस में 29 अगस्त 2012 की मध्य रात्रि को उन्होंने आखिरी सांस ली। श्री मोहन लहरी के साथ आज उस जीवित इतिहास का अंत हो गया जो भारतीय स्वतंत्रता के →आगे पढ़ें ..





कीड़े- मकोड़ों की 1400 प्रजातियों को इंसान खा सकता है। हालांकि नई बात नही है। आज भी कीडे़ भोजन का एक हिस्सा है। विदेशों मे चाव से खाये जाते है। आफ्रीका में टिड्डे तो जापानी ततैयों को मजे से खाते हैं।
सवाल टेढ़ा है। समय भी बहुत है। बीस साल आते तक पता नही क्या होगा। कितनों का ठिकाना बदल जायेगा। कुछ इस दुनिया मे रहेंगे। कई पता नही कहां रहेंगे। इतना जरूर है, जहां भी रहेंगे खाना खाएंगे। सवाल
जयकृष्ण गौड़
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्ला का बयान ना केवल सच्चाई से परे है बल्कि इसमें अलगाववादी साजिश की पृष्ठभूमि दिखाई देती है कि इस बार लड़ाई बंगलादेशी और बोडो के बीच में नहीं थी बल्कि यह संघर्ष बोडो और बोडलैंड टेरिटोरियल आटोनोमस डिस्ट्रिक में रहने वाले मुस्लिमों के बीच है | आयोग ने सरकार को प्रस्तुत रिपोर्ट में स्वीकार किया कि असम में कुछ घुसपैठ हो रहती
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