“प्रिंस बेहतरीन एक्शन फ़िल्म है’’ – विवेक ओबेरॉय

अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने निर्देशक राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म ”कंपनी” से अपना अभिनय सफ़र आरम्भ किया, इस फ़िल्म में उन्होंने शानदार अभिनय किया और दर्शको की वाह वाही लूटी. अपने गजब के अभिनय से विवेक ने अपनी पहली ही फ़िल्म से एक अलग ही जगह बनाई. इस फ़िल्म के बाद रोड, दम, साथियायुवा, मस्ती, ओमकारा, शूटआउट एट लोखंडवालामिशन इस्तानबुल आदि अनेको उनकी फ़िल्में आ चुकी हैं. पिछले दिनों आयी फ़िल्म ”कुर्बान” में भी उनका अभिनय बहुत ही अच्छा था. इस समय विवेक एक बार फिर चर्चा में हैं  क्योंकि उनकी एक नयी फ़िल्म प्रिंस – इट्स शो टाइम”  जल्दी ही रिलीज़ होने वाली है. टिप्स फिल्मस की प्रस्तुति प्रिंस – इट्स शो टाइम” के निर्माता हैं कुमार एस तौरानी व निर्देशक हैं कूकी गुलाटी. विवेक से बातचीत हुई उनकी इसी आने वाली फ़िल्म को लेकर, पेश हैं कुछ अंश –

  • इस फ़िल्म की कहानी क्या है?

कहानी है एक चोर की, जिसको पकड़ने के लिए इंडिया की सीक्रेट सर्विस सी बी आई लगी हुई है, उसके हाथ में चोट लग जाती है सुबह जब उसकी नींद खुलती है तो उसे कुछ भी याद नहीं आता कि वो कौन है और कैसे उसे यह चोट लगी. उसे बस इतना ही याद है कि वो सारंग व माया के लिए काम करता है. टिप्स फिल्मस की पेशकश इस फ़िल्म के निर्माता हैं कुमार एस तौरानी व निर्देशक हैं कूकी गुलाटी.

  • टिप्स के कुमार तौरानी के साथ काम करना कैसा रहा?

बहुत ही अच्छा, टिप्स फिल्मस की कोई यह पहली फ़िल्म नहीं है इससे पहले भी उन्होंने एक से बढ कर एक फ़िल्में बनायीं हैं, वो अपने दर्शको के बारें में जानते हैं की उन्हें कैसी फ़िल्में पसंद आती हैं. यह फ़िल्म भी निशिचित रूप से उन्हें पसंद आएगी.

  • ऐसा आप कैसे कह सकते हैं कि दर्शको को यह फ़िल्म पसंद आएगी?

क्योंकि इस एक्शन थ्रिलर फ़िल्म को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया है निर्देशक कूकी गुलाटी ने, इस फ़िल्म में कई सारे ऐसे एक्शन सीन हैं जिन्हें दर्शक पहली ही बार देखेगें. बिल्कुल होलीवुड स्टाइल के एक्शन सीन हैं.

  • सुना है कि आपने यह एक्शन सीन खुद किये हैं?

हाँ मैंने खुद ही किये हैं ये सारे सीन, बहुत खतरनाक स्टंट सीन हैं लेकिन इन्हें करने में बहुत ही मजा आया.

  • इसमें नया क्या है आज कल तो सभी हीरो स्टंट सीन खुद ही करते हैं?

हाँ वो तो है, लेकिन मेरी इस फ़िल्म को देखने के बाद आपको पता चलेगा कि ये सीन दूसरी फिल्मों से कितने अलग हैं.

  • आपके साथ इस फ़िल्म में एक नहीं तीन – तीन हीरोइने हैं, तो कितना मजा आया इन सभी के साथ?

बहुत ही मजा आया, तीनो ने बहुत ही अच्छा काम किया है, तीनो ही बहुत ही खूबसूरत लगी हैं फ़िल्म में.

  • सुना आपके और अभिनेत्री अरुणा शील्ड्स के बीच तो किसिंग सीन भी हैं, तो क्या कहना है इस बारें में, तो कितने रीटेक हुए इन सीन के?

मैंने पहली ही बार इस तरह के सीन परदे पर किये हैं तो निसंदेह रूप से रीटेक तो हुए ही हैं, लेकिन कोई जान बूझ कर कोई रीटेक नहीं हुए हैं.

  • आपकी आने वाली फ़िल्में कौन सी हैं?

एक तो रामू की ”रक्त चरित्र” है, इसके अलावा दो तीन फ़िल्में और भी हैं.

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About शशि सिन्घल

मैं शशि सिन्घल उत्तर प्रदेश के अपनी लाजवाब व सुन्दर धरोहर के लिए समूचे विश्व में प्रसिद्ध शहर आगरा में पली - बढ़ी हूं । यदि हम आज से पन्द्रह - सोलह बरस पीछे जाएं तो पाएंगे कि उस दुर में लड़कियों का घर से बाहर कदम रखना तो दूर उन्हें ज्यादा पढ़ने लिखने की इजाजत तक न थी । मगर इन विषम परिस्थितियों में मैंने आगरा कॉलेज आगरा से संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की उपाधि ली । आगे मैंने प्रोफेसर बनने की चाहत में इसी विषय से पी एच डी करने की शुरूआत की । मगर भाग्य को कुछ और मंजूर था जो मैं अपने एक सहपाठी की सलाह पर पत्रकारिता के क्षेत्र में कूद पडी़ । उस समय इस क्षेत्र में आज जैसी कठिन प्रतियोगिता नहीं थी । आगरा में अखबार के दफ्तर में उप - सम्पादक के पद पर कार्य करने वाली पहली महिला थी । सन १९८९ में उस समय की प्रतिष्ठित साप्ताहिक पत्रिका ’ धर्मयुग ’ ने पत्रकार महिलाओं पर एक परिचर्चा की जिसमे अपने विचार लिखने के लिए मेरे पास भी एक पत्र आया । धर्मयुग में मेरे विचार क्या छपे कि मेरे पास बधाई पत्रों का अंबार लग गया । बस फिए क्या था तब से लेकर आज तक में पत्रकारिता के नशे में चूर हूं और इस्का खुमार उतरने की बजाए चड़ताही जा रहा है । वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने के बाद काफी उतार चडा़व आये , कभी मेरी कलम लिख देती तो कभी ब्रेक लग जाता । इधर कुछ समय से ब्लॉगिंग का सुरूर भी छा गया है । समय व टॉपिक के हाथ लगते ही ब्लॉग पर टिपियाने आ जाती हूं ।

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