अब तक नहीं सुधरी बिहार पुलिस !

बात चाहे जो भी हो बिहार के डीजीपी ने पुलिस को चुस्त-दुरूस्त करने का और फरियादियों से उनके दोस्त बनकर काम करने का जो पाठ पढाया है वह बिलकुल इसके परे है।बिहार पुलिस यूं ही बदनाम नहीं है। बदनाम होने के कई कारण हैं। कभी बिहारी रंगरूटों ने महिला की पिटायी तो कभी!!!रंगदारी, हत्या, या फिर फिरौती के मामलों में कितने लोगों को पुलिस सजा दिला पाती है। न्यायालय से वह बाईज्जत बरी हो जाता है। आखिर क्यों! क्या यह सच नहीं है कि नेताजी की गलत पैरवी के कारण भी पुलिस बदनाम हुई है। भागलपुर जिले के तिलकामांझी थाना के दारोगा संजय विश्वास की ही बात करें तो उन्हें किसी का कोई भय नहीं है। उन्हें थाना में रंगदारी चाहिए, अन्यथा रंगदारी के झूठे मामले में अंदर कर देंगे।
अरे भाई! हम आपको किसी दारोगा की मनगढंत कहानी नहीं सुना रहे है। हम उनके द्वारा दर्ज की गयी प्राथमिकी की बात कर रहे हैं वो भी रंगदारी की। हुआ यह कि सत्ताधारी एक नेता जी के रिश्तेदार रमेश चंद्र चैबे ने थाना प्रभारी संजय विश्वास को विश्वास में लेकर उनके साथ विश्वासघात किया। पहले थाना के नंबर से अभियुक्तों को बुलाया, उनका नाम पता मालूम किया और फिर एक लाख रूपये रंगदारी की मांग की। थाना में रमेश चंद्र चैबे ने अभियुक्तों को नेताजी की रिश्तेदारी की भी याद दिलायी।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अनुसंधानकर्ता केके शर्मा परेशान हो गये। कहा थाना प्रभारी हम लोगों को भी अपने साथ। 28 दिसंबर को रविवार के दिन रंगदारी का मामला दर्ज किया गया है जबकि 28 दिसंबर को रविवार नहीं था। अभियुक्त के मोबाइल पर थाना के टेलीफोन से प्रभारी ने दिन के 12 बजे फोन कर थाना बुलाया और थाना अभिलेख में घटना की जानकारी 3 बजे शाम में दर्शाया गया है। बता दें कि झूठा मामला दर्ज करने का नतीजा यह हुआ कि पुलिस कप्तान बच्चू सिंह मीणा ने मामले की जांच का जिम्मा डीएसपी को सौंपा है, अभियुक्तों पर थाना प्रभारी की गाज तो नहीं गिरी लेकिन इस मामले में जितने गवाह हैं उन्हें पुलिस परेशान कर रही है। आखिर सत्ताधारी नेताजी की बात जो है। ऐसे में हम कैसे कह सकते हैं कि हमारी बिहार पुलिस की छवि बदल रही है। और कैसे हम कह सकते हैं कि यही सुशासन है। क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भरी सभा में कहते फिरते हैं कि हमारे बारे में न्यूज वीक और टाइम्स आफ इंडिया में खबर छपती है हमारी अच्छाईयों के बारे में। हम यह नहीं कह रहे है कि नीतीश जी अच्छा काम नहीं कर रहे हैं लेकिन पुलिस की छवि से बिहार में सभी वाकिफ हैं और इस तरह के कारनामों ने बिहार पुलिस की छवि को दागदार किया है।

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About समीर "गुड्डू"

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One Response

  1. बिहार में तो मैं देखता हूँ कि पुलिस की स्थिति ऐसी है कि ट्रेन में कोई सामान ले जा रहे मुसाफिर से वे पैसे वसूलते हैं। सब्जी मंडी में सब्जीवाले से सब्जी वसूलते हैं। …………. अब यह तो हमारी सरकार ही बताएगी कि वह पुलिस को तनख्वाह देती है या नहीं कि पुलिसवाले अपने पेट पालने के लिए इस प्रकार पैसे वसूलते हैं।

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