रिश्ते – हमारी जीवनरेखा

रिश्ते है तो हम हैं, जाने अनजाने रिश्ते ही हमारे उत्थान के प्रेरक हैं.
आज वेलेंटाइन्स डे है, जो कि हर १४ फ़रवरी को अपने प्यार और लगाव को जताने के लिए मनाया जाता है. इस दिन का इज़हार अपने चाहने वाले को फूलों का गुलदस्ता दे कर किया जाता है. जब संत वेलेंटाइन ने इस परंपरा को शुरू किया था तो शायद वे इसके गहरे अर्थ को समझते थे. सद्भाव और आपसी लगाव का ही दूसरा नाम है वेलेंटाइन्स डे.
वाकई कितनी आवश्यकता है आज हमें सद्भाव और लगाव की.

अमेरिका की ग्रीटिंग कार्ड असोसिएशन के आंकड़ो के हिसाब से आज के दिन संसार भर में लगभग दस करोड़ वेलेंटाइन भेजे जातें है, क्रिसमस के बाद वेलेंटाइन्स डे संसार का सबसे बड़ा कार्ड-सेंडिंग त्यौहार है. सारे संसार की तरह भारत में भी इस त्यौहार की बड़ी धूम होती है, खासकर नौजवानों में. युवक और युवतियां इस दिन को अपने प्यार का इज़हार करने के लिए सबसे वाज़िफ दिन मानते है.

ये त्यौहार अपने रिश्तों को निभाने, नए रिश्ते बनाने और अपने आप को रिश्तों के बारे में याद दिलाने का महत्तवपूर्ण कम करता है. अगर इस त्यौहार के बारे में गहराई से सोचें तो ये मानवता का एक बड़ा सबक हमें पढाता है.
ये त्यौहार हमें रिश्तों के महत्त्व के बारे में याद दिलाता है.

मानव जीवन रिश्तों के जाल में फसा हुआ है. हमारे विचार, हमारे कृत्य, हमारा स्वाभाव यहाँ तक की हमारा अपने आप को व्यक्त करने का तरीका भी रिश्तों से प्रेरित होता है. हर किसी से हमारा रिश्ता है, दोस्ती का, प्यार का, सद्भाव का और कुछ नहीं तो मानवता का. रिश्तों का हम पर और हमारा रिश्तों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है.
हमारा हर कृत्य कहीं न कहीं, किसी न किसी रिश्ते को प्रभावित करता है, और समय के साथ हम इसकी प्रतिक्रिया से भी दो चार होते है. एसा मन जाता है कि हमारे अच्छे और बुरे कर्म, अच्छे और बुरे परिणामो के साथ हमें इसी जन्म में वापस मिलते है.
रिश्तों को समझदारी से निभाने वाले सफल इंसान होते है.

आज जबकि संसार फ़ैल रहा रहा है, तरह तरह के उपकरण इजाद हो रहे है जिनसे हम लोगों के संपर्क में आसानी से रह सकते है, परन्तु बावजूद आधुनिकीकरण के, हम शायद अपने रिश्तों से दूर होते जा रहे है. हम नए रिश्ते बनाने के उत्साह को भूल चुके है. हम परवाह नहीं करते कि हमारे पडोसी के घर में क्या समस्या है. संपर्क सुख के बजाय आशंका और दुःख फैला रहे है. हम जी तोड़ कोशिश करते है है कि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों से दूर रहे और पास सिर्फ उनके आयें जो हमें भविष्य में लाभ पहुचानें की क़ाबलियत रखतें हो. मेरी दृष्टि में ये हमारी एक बड़ी भूल है और हमारे विषाद का एक बाद कारण है.

एक पुराने दोस्त से से दुबारा मिलने की ख़ुशी, एक दुश्मन को दुःख पहुचने से प्राप्त होने वाले आनंद से कहीं बड़ी होती है. बहुमूल्य होती है वो चमक जो आप की माँ की आँखों में आती है, जब आप उससे कहते हो की आप उससे प्यार करते हो. अंत पंत एक करोड़पति को भी एक फकीर के साथ ही दफ़न होना है, हम सब का भविष्य मिट्टी में मिलना ही है, और मिट्टी भेद नहीं करती तो हम क्यों करें?

आइये इस वेलेंटाइन्स डे से एक नयी शुरुआत करे.
रिश्तों के महत्तव को समझे.
सबको जिन्हें हम जानते है, ये बताए की वो हमारे लिए कितने ज़रूरी है, उनका हमारे जीवन पर कितना प्रभाव है, और हम इसके लिए कितने कृतार्थ है.
जिन्हें हम नहीं जानते, उन्हें जानने की कोशिश करें. उनके नज़दीक जाएँ.
जिनसे हम घृणा करतें है उनके बारे में अपना नजरिया बदलने की कोशिश करे, अपने आप को उनकी जगह रख कर उनके पक्ष को समझने की कोशिश करें.
यही तो था संत वेलेंटाइन का सपना, आइये उसे चरितार्थ करें.

और हाँ. . . आपको वेलेंटाइन डे की बहुत बहुत शुभकामनायें. और धन्यवाद! आपका अस्तित्व मुझे जीवन को सकारात्मक बनाने के लिए प्रेरित करता है :-)

About राहुल चौधरी

मैं विज्ञान से स्नातक और प्रबंधन से स्नातकोत्तर हूँ. अपनी सारी शिक्षा मध्यप्रदेश में पूरी की है. आजकल अहमदाबाद में भारतीय बहुराष्ट्रीय दवाइयों की कंपनी, जायडस कैडिला में मार्केटिंग हेड के पद पर कार्यरत हूँ. बचपन से लिखने और अपने विचारों को व्यक्त करने, लिखने और संगीत का शौक रहा है. समय की कमीं की वजह से नियमित तो नहीं लिख पता, पर जब भी खाली समय मिलता है, कुछ ना लिखता-पढता या सुनता-बजता रहता हूँ. visit me on www.rahulzydus.com

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