अद्भुत! अवर्णनीय!! विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के वाहनों का काफिला काशी से चल कर
लालगंज कस्बे में प्रवेश करता है। सड़क के दोनों और हजारों लोग गो रथ के दर्शन के लिए
खड़े हैं। बैंड बज रहा है, स्वागत हो रहा है। तोरण बंधे हैं। महिलायें छतों और झरोखों से झांक
रही हैं, पुष्पवर्षा कर रही हैं। उत्साही किशोर पेड़ों पर च़कर अपना कौतूहल शान्त कर रहे
हैं।
लालगंज की तीन किलोमीटर की दूरी पार करने में दो घंटे से अधिक समय लगता है। 
स्वामी परमानन्द महाराज अनायास ही उल्लेख कर देते हैं जनकपुर का, जहां राम और लक्ष्मण
नगरवासियों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने ‘रामचरित
मानस’ में इसका मनोहारी वर्णन किया है।
आजमगढ़ के रामानंद कहते हैं॔ -” ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई हमारी बात कह रहा
है। राजनैतिक आश्वासन हमने बहुत सुने हैं पर गांव का स्वाभिमान जगाने और जीवन स्तर ऊपर
उठाने की बात इस तरह से पहली बार हो रही है।”
वहीं लालगंज के नजदीकी गांव के निवासी रामकेवल यादव कहते हैं॔ -“हमें जो बताया गया,
वही हम करते रहे। सरकार ने हमें बताया कि पशुओं की नस्ल सुधार से ज्यादा दूध मिलेगा,
हमने जर्सी गाय पालनी शुरू की। सरकार ने हमें कहा यूरिया डालो, पैदावार बढ़ेगी .”
विश्व की आत्मा भारत है, भारत की आत्मा गांव है, गांव की आत्मा किसान हैं और किसान की आत्मा
गाय है। इसलिए गाय पूरे विश्व की आत्मा है। भारत पश्चिमी देशों के अनुकरण से विकास के नाम पर विनाश की ओर जा रहा है। हमने अपने जल, वायु, और जमीन प्रदूषित कर दिये। परिणामस्वरूप नयी पीढ़ी ओज और तेज विहीन हो रही है। अब हमारे लिए पुनः ग्राम की ओर, गाय की ओर जाना आवश्यक हो गया है। आज आवश्यकता है कि प्रत्येक व्यक्ति गो माता के प्रति दिल में प्रेम रखे। शहरी जीवन में लिप्त लोगों को भी चाहिए कि वे गोशालाओं में अपनी गायों को पालें।’’ 



January 10, 2010 at 10:44 pm
प्रिय आत्मानन्द जी…वो तो ठीक है कि आपने अपने गो प्रेम के चलते शहरी जीवन व्यतीत कर रहे लोगो को ये सलाह दी कि वो गोशालाओं में अपनी गायों को पालें…मैं भी इसका समर्थन करता हूँ।परंतु जिस भारत की आत्मा गाँवों में बसती है उसके दिल यानि कि दिल्ली में कितनी गोशालायें हैं??एक बवाना और एक कशमीरी गेट!! इसे तो उंगलियों पर गिनना भी बेमानी होगा……तो क्युं ना एक मुहिम इस ओर भी छेङई जाये…दिल्ली की एक विधानसभा सीट में कम से कम 35 पार्क से अधिक आते हैं…तो क्या 70 विधानसभाओं से 7 गोशालायें भी नहीं निकल सकती…??…बिलकुल निकल सकती हैं।……तो आइये एक मुहिम इस ओर भी शुरू की जाये….सुझाव देने भर से बात न बनेगी………मुझे आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा….अनूप आकाश वर्मा……