गम का है मौसम….

गम का है मौसम, 925008_164541_dc48bc5494_p

मौसम जुदाई का,

तुझको कसम है जाना,

तेरी खुदाई का,

गम का है मौसम……………….

तुझको मैं भूलूं,

भूल न पाऊ मैं,

विरहा की अगनी में

जलता ही जाऊ मैं,

तुझ बिन जीवन में,

जी कहां पाऊ,

गम का है मौसम………………..

तेरे रूप का दीवाना मैं

दीवानापन ऐसा छाया,

अकेला ही भटका,

खालीपन ऐसा पाया,

घर से भी बिछड़ा

 ने साथ छोड़ा,

गम का है मौसम………………..

Tags: , , , , , , , , ,

About नरेन्द्र निर्मल

नरेन्द्र निर्मल , जनोक्ति के कार्यकारी संपादक हैं . निर्मल मूलतः बोकारो (झारखण्ड) के निवासी है और वर्त्तमान में दिल्ली में पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. गत पांच वर्षो से विभिन्न सामाजिक और काव्य मंचो पर उपस्थित रहे. निर्मल जी कवि और समाजसेवक के रूप में भी जाने जाते हैं. “वाई एम् सी ए ” से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद ‘ जन आवाज’ निर्माण संवाद ‘ जिन्दा लोग’ आदि पत्रिकाओं के साथ -साथ जयप्रकाश अंतर्राष्ट्रीय शोध संस्थान से भी जुड़े रहे हैं .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*

  (To Type in English, deselect the checkbox. Read more here)
SEO Powered by Platinum SEO from Techblissonline Lingual Support by India Fascinates