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	<title>Comments on: हाय हाय ये महंगाई</title>
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		<title>By: anoop aakash verma</title>
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		<dc:creator>anoop aakash verma</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Jan 2010 18:28:50 +0000</pubDate>
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		<description>कमज़ोर विपक्ष की देन है महँगाई....
बात सुनने में भले ही बेहद अजीब लगे पर है शत प्रतिशत कटु वचन,और इसी कमज़ोर विपक्ष् के चलते आज आम आदमी की कमर उसी सरकार ने तोङ कर रख दी है जो गरीबों का हाथ थामने की बात कर रही थी.....खैर! सरकार के पास अपनी कज़ोरियों को छिपाने के लिये आंकङओं की कोई चोंचले बाजी हो सकती है परंतु अकारण बिना मुद्दों के भी बखेङा खङा करने वाला विपक्ष अपने कान में तेल डाले आज् कहाँ सोया पङा है??... क्या ये मुद्दे नहीं हैं??...क्या इनका ताल्लुक हमारे विपक्ष को आम आदमी से जुङा हुआ नहीं लगता??....क्या गरीबों की भूख से व्याकुल आंखें मौजूदा विपक्ष को सरकार के प्रति कोइ ठोस कदम उठाने के लिये नहीं उकसाती??.....समझ नहीं आता इसे सरकार् का सौभाग्य कहें या देश का दुर्भाग्य की कमज़ोर विपक्ष का खामियाज़ा बेचारी भोली भाली जनता को भुगतना पङ रहा है...और शायद ये हमारे कमज़ोर विपक्ष की सुस्ती का ही परिणाम है की अब शरद पवार ये कहने से भी नही हिचकिचा रहे है-&quot;कि मै मंत्री हूँ,कोइ ज्योतिष नही.....&quot; सचमुच!ये बात हम सभी जानते है कि मंत्री जी ज्योतिष नहीं है,मगर मंत्री तो हैं..मगर हमारा विपक्ष इन मुद्दो पर भी हमेशा की तरह इस बार भी ना चाहते हुए भी मालुम होता है कि फिर आंखें मूंदे बैठा है...लालू जी पूरी तरह से फिर बिहार लौट गये अपनी ज़मीन तलाशने....देवगौङा अपने ही राज्य के मंत्रियों को गाली-गलोच देने में वयस्त हैं....जिन लोगों मे थोङई बहुत तथाकथित उर्जा बची हुई थी वो उन लोगों नें अलग राज्य की मांग में लगा दी.....मुलायम अपनी साइकिल की ही रिपेय्रिंग मे ही लगे हुये हैं....बहन जी की सरकार मजे में चल ही रही है....लेफ्ट कभी-कभार भले ही महँगाई के मुद्दे पर अपनी कमर सीधी करता हुआ नज़र भी आता है परंतु शायद उस पर भी अन्य खरबुजो का रंग चङने लगा है......और इन सबसे आगे केन्द्र का प्रमुख विपक्षई दल....वो अपने ही अंदरूनी मुद्दो मे इस कदर उलझ कर रह गया कि 
जनता के हित के मुद्दे उसे दूर के सुहावने ढओल् लगने लगे...और अब ऐसे मे जिसे सही अर्थों में सन्यास ले लेना चाहिये.....वो किसी ना किसी जगह फिट है.....और जो काम करने लायक हैं...वो राजनीति से सन्यास लेना चाहते हैं....अब ऐसे मे सरकार की नीतियों पर नज़र रखे तो रखे कौन????.........ये सवाल हमारे कमज़ोर विपक्ष के सामने महँगाई के काल की तरह मुँह बाये खङा है......और &quot;मैं ज्योतिष नहीं हूँ..&quot;....कहकर सरकार ने एक दिन-प्रतिदिन कमज़ोर होते विपक्ष के मुँह पर तमाचा जङा है........जिसके निशानों को हम अब बङती हुई महँगाई क रूप में देखेगें............................अनूप आकश वर्मा...............</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कमज़ोर विपक्ष की देन है महँगाई&#8230;.<br />
बात सुनने में भले ही बेहद अजीब लगे पर है शत प्रतिशत कटु वचन,और इसी कमज़ोर विपक्ष् के चलते आज आम आदमी की कमर उसी सरकार ने तोङ कर रख दी है जो गरीबों का हाथ थामने की बात कर रही थी&#8230;..खैर! सरकार के पास अपनी कज़ोरियों को छिपाने के लिये आंकङओं की कोई चोंचले बाजी हो सकती है परंतु अकारण बिना मुद्दों के भी बखेङा खङा करने वाला विपक्ष अपने कान में तेल डाले आज् कहाँ सोया पङा है??&#8230; क्या ये मुद्दे नहीं हैं??&#8230;क्या इनका ताल्लुक हमारे विपक्ष को आम आदमी से जुङा हुआ नहीं लगता??&#8230;.क्या गरीबों की भूख से व्याकुल आंखें मौजूदा विपक्ष को सरकार के प्रति कोइ ठोस कदम उठाने के लिये नहीं उकसाती??&#8230;..समझ नहीं आता इसे सरकार् का सौभाग्य कहें या देश का दुर्भाग्य की कमज़ोर विपक्ष का खामियाज़ा बेचारी भोली भाली जनता को भुगतना पङ रहा है&#8230;और शायद ये हमारे कमज़ोर विपक्ष की सुस्ती का ही परिणाम है की अब शरद पवार ये कहने से भी नही हिचकिचा रहे है-&#8221;कि मै मंत्री हूँ,कोइ ज्योतिष नही&#8230;..&#8221; सचमुच!ये बात हम सभी जानते है कि मंत्री जी ज्योतिष नहीं है,मगर मंत्री तो हैं..मगर हमारा विपक्ष इन मुद्दो पर भी हमेशा की तरह इस बार भी ना चाहते हुए भी मालुम होता है कि फिर आंखें मूंदे बैठा है&#8230;लालू जी पूरी तरह से फिर बिहार लौट गये अपनी ज़मीन तलाशने&#8230;.देवगौङा अपने ही राज्य के मंत्रियों को गाली-गलोच देने में वयस्त हैं&#8230;.जिन लोगों मे थोङई बहुत तथाकथित उर्जा बची हुई थी वो उन लोगों नें अलग राज्य की मांग में लगा दी&#8230;..मुलायम अपनी साइकिल की ही रिपेय्रिंग मे ही लगे हुये हैं&#8230;.बहन जी की सरकार मजे में चल ही रही है&#8230;.लेफ्ट कभी-कभार भले ही महँगाई के मुद्दे पर अपनी कमर सीधी करता हुआ नज़र भी आता है परंतु शायद उस पर भी अन्य खरबुजो का रंग चङने लगा है&#8230;&#8230;और इन सबसे आगे केन्द्र का प्रमुख विपक्षई दल&#8230;.वो अपने ही अंदरूनी मुद्दो मे इस कदर उलझ कर रह गया कि<br />
जनता के हित के मुद्दे उसे दूर के सुहावने ढओल् लगने लगे&#8230;और अब ऐसे मे जिसे सही अर्थों में सन्यास ले लेना चाहिये&#8230;..वो किसी ना किसी जगह फिट है&#8230;..और जो काम करने लायक हैं&#8230;वो राजनीति से सन्यास लेना चाहते हैं&#8230;.अब ऐसे मे सरकार की नीतियों पर नज़र रखे तो रखे कौन????&#8230;&#8230;&#8230;ये सवाल हमारे कमज़ोर विपक्ष के सामने महँगाई के काल की तरह मुँह बाये खङा है&#8230;&#8230;और &#8220;मैं ज्योतिष नहीं हूँ..&#8221;&#8230;.कहकर सरकार ने एक दिन-प्रतिदिन कमज़ोर होते विपक्ष के मुँह पर तमाचा जङा है&#8230;&#8230;..जिसके निशानों को हम अब बङती हुई महँगाई क रूप में देखेगें&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.अनूप आकश वर्मा&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</p>
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		<title>By: Rakesh Singh</title>
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		<dc:creator>Rakesh Singh</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Dec 2009 18:19:00 +0000</pubDate>
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		<description>अब जबकि कालाबाजारियों,जमाखोरों और मुनाफाखोरों की टीम राजनितिक पार्टियों को मोटा चन्दा देते हैं तो इस अवस्था मैं राजनितिक&#160;पार्टियां&#160;इनके गलत कार्यों मैं सहयोग को अपना फर्ज मानती हैं &#124;
&#160;
वैसे लगता है जनता भी महंगाई पे घडयाली आंसू ही बहती है ... और वोट उसी पार्टी को देती है जो महंगाई के लिए जिम्मेदार है &#124;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अब जबकि कालाबाजारियों,जमाखोरों और मुनाफाखोरों की टीम राजनितिक पार्टियों को मोटा चन्दा देते हैं तो इस अवस्था मैं राजनितिक&nbsp;पार्टियां&nbsp;इनके गलत कार्यों मैं सहयोग को अपना फर्ज मानती हैं |<br />
&nbsp;<br />
वैसे लगता है जनता भी महंगाई पे घडयाली आंसू ही बहती है &#8230; और वोट उसी पार्टी को देती है जो महंगाई के लिए जिम्मेदार है |</p>
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