हर साल की तरह इस साल भी तालिमी मेला आया और हमारे कुछ यादों को हमारे दिलों में छोड़ गया। ये यादे हमें कब तक याद रहेंगी ये तो कहा नहीं जा सकता है। मगर इन यादों के ख़जाने में एक ऐसी घटना है जो शायद ही कभी भुलाई जा सके। वो घटना कुछ इस प्रकार है कि विश्वविद्यालय के प्रांगण में विश्वविद्यालय का एक पूर्व छात्र अहसान (काल्पनिक नाम) आता है और कहता है "जामिया वाले मुझे भुलना चाहते हैं मगर मैं इन्हें खुद को भुलाने नहीं दुँगा’’ और वो तीनचार हवाई फायर करता है। यह घटना अपने आप में एक अद्भुत घटना है। मगर इस घटना का कारण हमारे समाज के युवाओं के एक बहुत बड़ी सच्चाई को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है। और हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आख़िर इसका जिम्मेदार कौन है? आमिर खान की बहुचर्चित फिल्म ’’रंग दे बसंती’’में उन्होंने एक डायलॉग दिया कि यूनिवसर्टी के इस गेट के अंदर डीजे की एक औकात है। सब कहते हैं डीजे में कुछ बात है, डीजे कुछ करेगा। मगर इस गेट के बाहर न जाने कितने डीजे पीस गए है दुनिया की भीड़ में।’’ । फिल्म में जितना प्रासंगिक ये बात थी ठीक उतनी ये आज पूरे विश्व के लिए है। कॉलेज गेट के अंदर अपने गु्रप के अंदर हर लड़के की एक पहचान होती है। मगर वहीं लड़का जब कॉलेज गेट को पार करके इस दुनिया की भीड़ में आता है और मगर वो इस भीड़ में अपनी एक पहचान कायम नहीं कर पाता है तो उसके अंदर ही अंदर एक विदु्रप जन्म लेने लगता है। ऐसी स्थिति में वह या तो खुद को नुकसान पहुँचा लेता हैं या फिर उस जगह वापस पहुँच जाता है। जहाँ उसकी पहचान थी। अगर विज्ञान के आधार पर देखे तो वैज्ञानिकों का मानना है कि कुद लड़के अपनी छवि को लेकर कुछ ज्यादा संवेदनशील होता हैं, या उन्हें अपनी एक अलग पहचान चाहिए होती है। और अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो वे हिसंक हो जाते हैं। इसे हम असामान्य व्यवहार कहा जा सकता है। यह कहानी सिर्फ उस अहसान की ही नहीं है बल्कि हमारे जैसे उन हजारों – लाखों लोगों की है जो अपनी पहचान बनाने के लिए इस दुनिया से जद्दोजहद कर रहे हैं। यह घटना हमारे लिए सिर्फ घटना ही नहीं बन पाई क्योंकि मैं भी अहसान से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता हूँ। बहरहाल अब इन बातों को छोड़कर हमें इस बात की दुआ करनी चाहिए की अहसान इस भीड़ में खोने की बजाय अपनी एक पहचान बना पाएं।
पाठक उवाच
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rajivmonga: it isa great effort and i personally feel that those who are inte...
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prithvi raj sharma: लेख अच्छा लगा...
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bhootnath: jayram ji,mere is aalekh ko janokti par prakaashit karne ke liye ...
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Dr. Rajesh Kapoor: फुलारा जी! बहुत सुंदर. आपकी लेखनी में दम है, कोई शकनहीं. अनेक लेख...
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Dr. Rajesh Kapoor: जीतू जी, आपकी टिप्पणियां पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. कुछ तो लोग हैं जिन...
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