तलाश एक कारवाँ की….


मेरे पंख मुज़से छीनलो,

मुझे आसमॉ की तलाश है।

मैं हवा हूँ मुझको न बॉधलो ,

मुझे ये समॉ की तलाश है।

मुझे मालोज़र की ज़रुर क्या?

मुझे तख़्तो-ताज चाहिये !

जो जगह पे मुज़को सुक़ुं मिले,

मुझे वो जहाँ की तलाश है।

मैं तो फ़ुल हूं एक बाग़ का।

मुझे शाख़ पे बस छोड दो।

में खिला अभी-अभी तो हूं।

मुझे ग़ुलसीतॉ की तलाश है।

हो भेद भाषा या धर्म के।

हो ऊंच-नीच या करम के।

जो समझ सके मेरे शब्द को।

वही हम-ज़बॉ की तलाश है।

जो अमन का हो, जो हो चैन का।

जहॉ राग_द्वेष,द्रुणा हो।

पैगाम दे हमें प्यार का

वही कारवॉ की तलाश है।



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1 Comment

  • APNEE BAAT AUR JAZBAAT AAPNE BADI KHOOBSOORATI K SAATH LAFZON ME BAANDH KAR PESH KIYE HAIN

    मुझे मालोज़र की ज़रुर क्या?

    मुझे तख़्तो-ताज न चाहिये !

    जो जगह पे मुज़को सुक़ुं मिले,

    मुझे वो जहाँ की तलाश है।

    WAAH
    WAAH
    WAAH
    ————badhaai !

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