तलाश एक कारवाँ की….


मेरे पंख मुज़से छीनलो,

मुझे आसमॉ की तलाश है।

मैं हवा हूँ मुझको न बॉधलो ,

मुझे ये समॉ की तलाश है।

मुझे मालोज़र की ज़रुर क्या?

मुझे तख़्तो-ताज चाहिये !

जो जगह पे मुज़को सुक़ुं मिले,

मुझे वो जहाँ की तलाश है।

मैं तो फ़ुल हूं एक बाग़ का।

मुझे शाख़ पे बस छोड दो।

में खिला अभी-अभी तो हूं।

मुझे ग़ुलसीतॉ की तलाश है।

हो भेद भाषा या धर्म के।

हो ऊंच-नीच या करम के।

जो समझ सके मेरे शब्द को।

वही हम-ज़बॉ की तलाश है।

जो अमन का हो, जो हो चैन का।

जहॉ राग_द्वेष,द्रुणा हो।

पैगाम दे हमें प्यार का

वही कारवॉ की तलाश है।



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About जनोक्ति डेस्क

यह लेखनी कैसी कि जिसकी बिक गयी है आज स्याही ! यह कलम कैसी कि जो देती दलालों की गवाही ! पद-पैसों का लोभ छोड़ो , कर्तव्यों से गाँठ जोड़ो , पत्रकारों, तुम उठो , देश जगाता है तुम्हें ! तूफानों को आज कह दो , खून देकर सत्य लिख दो , पत्रकारों , तुम उठो , देश बुलाता है तुम्हें ! बाज़ार के चंगुल से मुक्त अभिव्यक्ति का मन्च ब्लागिंग के रूप में सामानांतर विकल्प बन कर उभरा है तो हमारी जिम्मेदारी है कि छोटी लकीरों के बरक्स कई बड़ी रेखाए खिची जाएं. बाज़ारमुक्त और वादमुक्त हो समाजहित से राष्ट्रहित की ओर प्रवाहमान लेखन समय की मांग है. और इस दिशा में " जनोक्ति .कॉम " जनोक्ति वेब मीडिया का प्रथम प्रयास है
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One Response

  1. APNEE BAAT AUR JAZBAAT AAPNE BADI KHOOBSOORATI K SAATH LAFZON ME BAANDH KAR PESH KIYE HAIN

    मुझे मालोज़र की ज़रुर क्या?

    मुझे तख़्तो-ताज न चाहिये !

    जो जगह पे मुज़को सुक़ुं मिले,

    मुझे वो जहाँ की तलाश है।

    WAAH
    WAAH
    WAAH
    ————badhaai !

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