पर्यटन|2011/08/30 11:24 am

पर्यटन व्यवसाय बदल सकता है बिहार की तस्वीर

राजीव कुमार
बिहार के बंटवारे के बाद नये राज्य झारखंड में खनिज पदार्थों के चले जाने से कृषि प्रधान बिहार में विकास की उम्मीदें महज खेती -किसानी पर ही टिकी थी, लेकिन जलवायु परिवर्तन, प्रत्येक वर्ष बाढ एवं सूखे की मार ने खेती को अनिश्‍चतता के अंधे सुरंग में ढकेल दिया। आर्थिक पिछडेपन का दंश झेल रहे बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद विकास एवं सुशासन के नारों के साथ बनी बिहार की वर्तमान सरकार के प्रयास से पिछले  वर्षों में (वर्ष 2006 से 2009) 38,824 अपराधियों को सजा सुनायी गयी। सरकार ने यह दावा किया है अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार तथा स्पीडी ट्रायल से हत्या , डकैती, लूट, दंगा और फिरौती जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में कमी आयी है। विधि व्यवस्था में उल्लेखणीय सुधार आया है। बदनाम बिहार की बदली हुई छवि ने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया। पिछले वर्ष देशी एवं विदेशी कुल 10414685 पर्यटकों ने बिहार पर्यटक स्थलों का भ्रमण किया, जबकि महज चार साल पहले विदेशी पर्यटकों की संख्या महज 63 हजार ही हुआ करती थी। पर्यटकों की आमद से उत्साहित सरकार कहती है कि यह बदले बिहार की तस्वीर है।

बिहार में पर्यटन का विकास कल्पनातीत थी। पर्यटन के क्षेत्र में विकास की जमीन तैयार की प्रदेश की विधि व्यवस्था ने। विधि व्यवस्था की अच्छी सेहत से पर्यटकों की आमद मे वृद्वि हुई है। अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित बिहार के बोधगया में पर्यटकों की उल्लेखणीय वृद्वि हुई। देश-विदेश से बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों के कारण तेजी से बोधगया के सामाजिक-आर्थिक स्वरूप में बदलाव आया है। पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्वि से उनके रहने के लिए अच्छे -अच्छें होटल और रेस्तरांओं की संख्या में इजाफा हो रही है। पर्यटकों की वृद्वि से यहां जमीन की कीमतों में उछाल आया है। पर्यटकों के रहने के लिए नये नये होटलों के निर्माण का काम तेज हो गया है। बोधगया में पर्यटन से बड़ा प्रभाव यह है कि यहां विदशी भाषाओं के जानकारों की मांग बढी है, फलत: उच्च शिक्षा या विदेशी भाषा की शिक्षा से कोसों दूर बोधगया के लोग कई विदेशी भाषाओं को जानने की दिशा में अग्रसर है। इस दिशा में जापान, थाईलैंड, कोरिया, म्यांमार, श्रीलंका, चीन आदि की पढाई शुरू की गई है, जहां बच्चों की रूचि बढ रही है। सरकार ने देर से ही सही, समृद्व ऐतिहासिक धरोहरों की पृष्ठभूमि तथा ग्राम प्रधान बाले बिहार में पर्यटन की असीम संभावनाओं को पहचाना। मगध, गुप्त एवं पाल जैसे राजाओं की राजनैतिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की धुरी बिहार की मिट्टी में बौद्व एवं जैन धर्मों का न सिर्फ जन्म हुआ बल्कि पूरी दुनिया में विस्तार भी हुआ ।
बिहार की मिट्टी से जुडे ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन के मानचित्र पर लाने के प्रति सरकार ने पर्यटन नीति में खास ध्यान दिया है। सरकार को पर्यटन से उम्मीदें है। पर्यटन के विकास की पूरी संभावनाएं है राज्य में। पर्यटन के इन क्षेत्रों में विकास के राज्य में ऐतिहासिक धरोहरों की पूरी श्रृंखला है। रमणीक एवं दर्शनीय स्थलों की बहुतायत है। नदियां, झरने पहाडियों की श्रृखला है। धार्मिक महत्व के स्थलों की कमी नहीं है। देशी पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्वि हुई है। बौद्व, जैन सिख, व हिन्दू धर्म से जुडे कई ऐसे स्थल है जहां काफी संख्या में देषी व विदेशी पर्यटक घूमने आते है। ऐसे स्थलों को सरकार विकसित कर रही है । देशी एवं विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए है। इसी कडी में ऐतिहासिक धरोहरों, पुरानी इमारतों, मंदिर आदि के साथ लगे पोखरों में नौका विहार की व्यवस्था की जा रही है। पर्यटकों के सुरक्षा के लिए विशेष दस्ता की व्यवस्था की गयी है। ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्थलों को विकसित करने के साथ- साथ उससे जुडी नदियों, झीलों और पोखरों का जीर्णोंद्वार कर उसमें नौका विहार की व्यवस्था शुरू करने जा रही है। शैलानियों को डलझील की विश्‍वप्रसिद्व हाउस बोट का लुत्फ गंगा की लहरों पर भी मिलेगा। गंगा में पर्यटन पट्टी विकसित की जाएगी। यहां स्थानीय देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए लग्जरी जहाज के साथ हाउस बोट भी चलेंगे।
गंगा के घाटों पर यात्री टर्मिनल, वेटिंग रूम, रेस्त्रां, पार्किग आदि बनेगा। गंगा में परिवहन एवं पर्यटन सुविधाओं का विकास सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना है। पटना के बाद इसका विस्तार अन्य शहरों में होगा। गंगा के अलावे कोसी, सोन, और गंडक में पर्यटन परिवहन की संभावना तलाशी जा रही है। वाटर टूरिज्म एवं इको टूरिज्म सहित बिहार में पर्यटन को विकसित करने के लिए रामायण सर्किट, गांधी सर्किट, सूफी सर्किट, सिख सर्किट, बौद्व सर्किट, जैन सर्किट आदि के जरिये बिहार के पौराणिक महत्व के स्थलों को विकसित करने का काम किया जाएगा। जिससे ऐतिहासिक महत्व के स्थानों में शामिल वन स्थल, भगवान राम एवं सीता से जुडे सीतामढी, महात्मा गांधी से जुडे स्थलों में चंपारण, गुरूगोविन्द सिंह से जुडे पटना साहिब, महात्मा बुद्व से जुडे बोध गया, जैन धर्म से जुडे पावापुरी जैसे स्थलों को पर्यटक स्थलों के तौर पर विकसित किया जाएगा। पर्यटन के विकास को दिशा देने के प्रयास के लिए आयोजित  दूसरे अर्न्तराष्ट्रीय बौद्व महोत्सव के अवसर पर जुटे अतिथियों ने बौद्व सर्किट को टूरिस्ट हब के रूप में परिणत करने पर बल दिया। उन्होंने बिहार के राजगीर, वैशाली, नालंदा एवं बोधगया जैसे स्थलों के विकास पर बल प्रदान किया है।  संभावनाओं को रेखांकित किया, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि इन जगहों पर आने वाले देशी व विदेशी पर्यटकों के समक्ष आज भी ढेरों शिकायत है।
गौरतलब है कि अतीत में देश के अन्य जगहों में भले ही विदेशी पर्यटकों का सिलसिला बढा हो, किन्तु बिहार में पर्यटकों की संख्या में वृद्वि के बजाय कमी ही बनी रही। राष्ट्रीय प्रतियोगिता बिहार का पर्यटन व्यवसाय हमेशा फिसड्डी ही रहा है। बोध गया सहित नालंदा, पावापुरी, राजगीर, विक्रमशीला जैसे ऐतिहासिक स्थलों के बावजूद बिहार का पर्यटन हाशिए पर रहा है। पर्यटन कभी भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल नहीं रही है। पंचवर्पीय योजनाओं में इसे नीचले पायदान पर जगह मिलती रही है। वर्ष 1981 में राज्य में पर्यटन विकास निगम का निर्माण हुआ। बातें तो बहुत हुई थी, लेकिन निगम के पास महज कुछ बसें थी। आज तक न तो बिहार में टूरिजम एक्ट बना और न ही होटल एक्ट । न तो राज्य में पर्यटन को उघोग की तरह बढावा देने के प्रयास हुए और न ही  किसी निवेशक को राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के लिए प्रेरित ही किया गया। शुरू से ही विधि व्यवस्था, आवास, आवागमन आदि की समस्या रही है। सरकार को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए  कि प्रदेश में सैलानियों की वृद्वि महज विधि व्यवस्था में सुधार से ही संभव है बल्कि इसके विकास के लिए  आधारभूत संरचना की सेहत में भी सुधार की भी उतनी ही जरूरत है। बिहार के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर पसरी गंदगी, स्तरहीन होटल, रोड साइड फैसलिटि का अभाव, वीजा की नई नीति और कस्टम व इमिग्रेशन कर्मियों द्वारा सैलानियों के प्रति बुरा बर्ताव आदि की समस्या बनी हुई है । सरकार को इन चुनौतियों  के समाधान के दिशा में मानक स्थापित करने होंगे। पर्यटन व्यवसाय में वह शक्ति है जिससे प्रदेश की तस्वीर वाकई बदल सकती है।

 

source : charkha news

Leave a Reply