श्रीलंका के महानतम स्पीनर मुथैया मुरलीधरन ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया है. फिलहाल भारतीय टीम तीन टेस्ट मैचों की श्रंृखला खेलने श्रीलंका गई है, जहां गॉल मैदान में खेले गए श्रृंखला के पहले टेस्ट के बाद मुरली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया. मुरली के अब टेस्ट मैचों में 800 विकेट हैं और वनडे में भी उनके नाम 515 से ज्यादा विकेट दर्ज हैं.
तो आखिर मुरली ने यह फैसला क्यों लिया ? याद कीजिए कुछ साल पहले की बात जब मुरली ने इस बात का ऐलान किया था कि वे तब तक खेलते रहेंगे, जब तक कि टेस्ट क्रिकेट में 1000 विकेट लेने का कारनामा न कर दिखाएं. उन दिनों मुरली के लिए टेस्ट मैच खेलना सबसे बड़ी प्राथमिकता हुआ करती थी और इसके लिए उन्होंने वनडे मैचों मंे खेलना भी बंद कर दिया था ताकि शरीर को पांच दिन के मैच के लिए बचाकर रखा जा सके. लेकिन अब हालात बदल गए हैं और इसके साथ ही मुरली की प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं. अब मुरली चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आईपीएल में खेलते हैं, जो उन्हें एक साल में करोड़ों रुपए पगार के तौर पर देती है. सो, आईपीएल के इसी पैसे ने मुरली को यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया है. श्रीलंका बोर्ड अपने खिलाड़ियों को एक वनडे खेलने के लिए 12000 रुपए देता है और एक टेस्ट मैच खेलने के लिए दो लाख रुपए. वहीं आईपीएल के एक सत्र में खेलने के लिए वर्तमान में चेन्नई की टीम मुरली को तीन करोड़ रुपए से भी ज्यादा दे रही है. इसका मतलब यह हुआ कि मुरली अगर आईपीएल के सभी 14 मैच खेलें तो भी उन्हें एक मैच के लिए बीस लाख रुपए दिए जाते हैं. यानी कि बीस ओवर प्रति पारी के ट्वेंटी-20 मैच में मात्रा 4 ओवर फेंकने के लिए बीस लाख रुपए. बस इसी पैसे ने मुरली को पे्ररित किया है कि वे अपने देश की टीम को अलविदा कह दें और आईपीएल को अपना बचा हुआ करियर समर्पित कर दें.
वैसे इस बात में कोई बुराई भी नहीं, क्योंकि यह व्यावसायिक दुनिया है और मुरली एक प्रोफेशनल खिलाड़ी. और फिर ऐसा भी नहीं है कि मुरली ने ही इस तरह का फैसला लिया हो. 2007 में ही जब आईपीएल का पहला संस्करण हुआ था तो कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की नियत डोल गई थी. आखिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पूरी ताकत, ऊर्जा झोंकने के बाद भी उन्हें चंद लाख रुपए नसीब होते थे, वहीं आईपीएल उन्हें करोड़ों रुपए दे रहा है. ऐसे में वाजिब है कि खिलाड़ी अपने देश के बजाए आईपीएल को ही तरजीह देंगे. शेन वार्न को ही देख लीजिए, जो आईपीएल में तो राजस्थान के लिए न सिर्फ खेलते हैं, बल्कि उसके कप्तान और कोच की भूमिका भी निभाते हैं. लेकिन अपने देश ऑस्ट्रेलिया की टीम से वो चार साल पहले हीे संन्यास ले चुके हैं. मैथ्यू हेडन, ग्लैन मैग्राथ, एडम गिलक्रिस्ट जैसे खिलाड़ियों ने भी बिलकुल यहीं किया. वे चाहते तो अपने देश की टीम के लिए तीन-चार साल और खेल सकते थे, लेकिन उन्होंने आईपीएल को अपने देश से ज्यादा तवज्जो दी.
मुरली भी ठीक यही कर रहे हैं. उनको मालूम है कि उनका करियर अब ज्यादा नहीं बचा है. वे ज्यादा से ज्यादा दो-तीन साल और खेल सकते हैं. इसीलिए मुरली इस समय का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा लेना चाहते हैं. चूंकि राष्ट्रीय टीम के लिए खेलते हुए कहीं चोटिल हो गए तो आईपीएल भी हाथ से चला जाएगा. इसलिए उन्होंने टेस्ट मैचों से किनारा कर लिया है, लेकिन कह रहे हैं कि अभी आईपीएल में चेन्नई की ओर से खेलते रहेंगे.
जाहिर है मुरली ने भी शेन वॉर्न, मैथ्यू हेडन और गिलक्रिस्ट की तरह ही सोचा. लेकिन काश, इन गोरे ऑस्ट्रलियाई खिलाड़ियों की ओर देखने की बजाए मुरली अपने पक्के दोस्त और अपनी टीम के सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी सनत जयसूर्या से ही सबक ले लेते. जयसूर्या इन दिनों श्रीलंका की टीम से बाहर हैं. श्रीलंका बोर्ड ने उन्हें अपने अनुबंधित खिलाड़ियों की सूची से भी बाहर पफेंक दिया है. लेकिन जयसूर्या अभी भी अपने देश की टीम में आने के लिए प्रतिबध हैं. इकतालीस साल की उम्र में भी वे इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेल रहे हैं, जिससे कि अच्छा प्रदर्शन करके श्रीलंका टीम में वापस आ जाएं. काश, मुरली भी अपने इस साथी खिलाड़ी से प्रेरणा ले लेते…
