प्रकृति|Shortlink: 2010/01/10 2:57 pm

दिल को छू रही है गाय और गांव की बात : आशुतोष

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  • प्रिय आत्मानन्द जी…वो तो ठीक है कि आपने अपने गो प्रेम के चलते शहरी जीवन व्यतीत कर रहे लोगो को ये सलाह दी कि वो गोशालाओं में अपनी गायों को पालें…मैं भी इसका समर्थन करता हूँ।परंतु जिस भारत की आत्मा गाँवों में बसती है उसके दिल यानि कि दिल्ली में कितनी गोशालायें हैं??एक बवाना और एक कशमीरी गेट!! इसे तो उंगलियों पर गिनना भी बेमानी होगा……तो क्युं ना एक मुहिम इस ओर भी छेङई जाये…दिल्ली की एक विधानसभा सीट में कम से कम 35 पार्क से अधिक आते हैं…तो क्या 70 विधानसभाओं से 7 गोशालायें भी नहीं निकल सकती…??…बिलकुल निकल सकती हैं।……तो आइये एक मुहिम इस ओर भी शुरू की जाये….सुझाव देने भर से बात न बनेगी………मुझे आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा….अनूप आकाश वर्मा……

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