कृषिजगत|2009/08/11 3:25 pm

रबड् की खेती में मुनाफे ज्यादा लेकिन आंकड़ों में हेराफेरी

Rubber-sheets

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1996-97  से लेकर 2008-09 तक के रबड् की आँकडे जो भारतीय रबड् बोर्ड  द्वारा प्रसारित की गई  हैं . उनके विश्लेषण करने पर  हेराफेरी के कई सबूत मिलते हैं  . एक हेक्टर रबड् की खेती से एक लाख रुपये तक का लाभ मिलता हैं। परन्तू रबड् बोर्ड की तरफ से  हेरा फेरी के आँकडे प्रसारित करके दाम ऊपर नीचे होने में मदद किया जा रहा है . यह किसानों के खिलाफ है .  इस बात के पुख्ता प्रमाण आप इस पन्ने पर देख सकते हैं.

केरल की बाकी फसलें घाटे में ही हैं।1983 में रबड् की दाम आरएसएस 4 का 16.72 रु प्रति किलो और 2008 में उसी ग्रेड के 107.75 रु प्रति किलो थे। 1983 से लेकर 2008 तक रबड्  का दाम मात्र 6.47 गुणा बढा लेकिन एक दूसरे दर्जे के यूनिवर्सिटी असिस्टेंट की आमद 13.83 जरुर बढ़ गई .यूनिवर्सिटी असिस्टेंट की आमद 1983 में बेसिक पे 675 रु + डीए 112 रु = 797 रु और 2008 में धनका 7990 और डीए 3036 रु = 11,026 रु था .इसी मुताबिक आगे भी चलता रहा तो  किसानों के हालात क्या होंगे कौन जानता है ? वर्तमान समय में सरकार का सारा ध्यान निजी क्षेत्र की ओर बढ़ता जा रहा है . देश की साठ प्रतिशत आबादी से जुड़े रोजगार ‘कृषि ‘ को लेकर कहीं कोई पहल की आहट नहीं सुनाई दे रही है . इतने व्यापक संभावनाओं वाले इस क्षेत्र को यूँ नज़रंदाज किया जाना एक दिन हम सब के लिए मुश्किल पैदा करेगा !

: – “चन्द्रशेखरन”

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