बन्दरों को भोजन न दें !

सरकार के आह्वान पर ध्यान देना चाहिए। खेती को खत्म करने की अनेक योजनाओं में से एक हैं बन्दरों का सदुपयोग। हजारों साल से किसान और बन्दर दोनों अपने-अपने अस्तित्व को बनाए हुए थे। अनायास बन्दर खेती के लिए मुसिबत बन गए। समस्या इतनी विकराल हो गई कि हजारों किसानों को खेती छोड़नी पड़ गई हैं। उनकी आर्थिक स्थिति पहले ही अच्छी नहीं थी, अब और बिगड़ गई। हिमाचल के हजारों एकड़ खेत खाली पड़े हैं जो किसानों की दुर्दशा की कहानी कह रहे हैं।

नासमझी भरे वृक्षारोपण ने स्थिति को बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है। वन विभाग द्वारा वनों में फलदार जंगली पौधे लगाए जाते तो हालत इतनी न बिगड़ती। बन्दरों को वनों में खाने को कुछ न कुछ मिलता रहता तो सन्तुलन बना रहता।

ध्वनि प्रदूषण और इलैक्ट्रो मैग्नैटिक तरंगों की अत्यधिक सघनता के कारण बन्दरों में भी मनुष्यों की तरह तनाव और काम वासना की वृ(ि विचारणीय है।

विदेशी षड्यन्त्र:- बन्दरों की संख्या अविश्वसनीय रूप में बढ़ी है। हजारों साल के इतिहास में ऐसा पहले कभी होने की जानकारी नहीं मिलती। खेती को कब्जाने, किसानों को खेती दूर भगाने की क्या कोई कुटिल चाल हो सकती है? हमें भूलना नहीं चाहिए कि बाजार में ऐसे फैरोन्ज, हारमोन्ज उपलब्ध है जिन के लगाने, छिड़कने के प्रभाव से स्त्री-पुरुष एक दूसरे की ओर जबरदस्त आकर्षण अनुभव करते हैं। होमोसैक्सुअल बना देने वाला सिंड्रोम सैनिकों में फैलाने की खबरें आ चुकी है । क्या बन्दरों में काम भावना और प्रजनन अभूतपूर्व गति से बढ़ाने के लिये किन्हीं विशेष हार्मोन, सिण्ड्रोम या तरंगों का प्रयोग किया गया होगा? बन्दरों के जीवन चक्र का गहराई से अध्ययन करके इस तरह के शरारती प्रयास करना असम्भव नहीं। इन कामों में अमेरिका का काफी नाम है।

बन्दरों को भोजन क्यों न दें?

भारतीय जनमानस में बन्दरों के प्रति श्रद्धा के कारण उन्हें आहार देने की परम्परा बहुत पुरानी है। पिछले कुछ वर्षों में यह प्रवृत्ति बन्दरों की संख्या के साथ-साथ बढ़ी है। भोजन के आकर्षण में सड़कों के आसपास सिमट आए हजारों बन्दरों को यात्रियों द्वारा फैका आहार मिलते रहने से वे खेतों से दूर रहेंगे।

बन्दरों को यात्रियों द्वारा फैंका आहार मिलता रहे तो कृषि और कृषकों के लिए बन्दरों का आतंक काफी कम हो जाता हैं। पर लगता है कि सरकार ;सभी दलों कीद्ध को किसानों की मुसीबतों से कोई वास्ता नहीं। उन्हें सड़कों पर बन्दरों का होना पसन्द नहीं या फिर किसानों की मुसीबतें बढ़ाने की गुप्त योजना में अनजाने में वह भागीदार बन रही है? अतः यदि आप भी सरकार के इस प्रयास के समर्थक हैं, खेती को उजाड़ना चाहते हैं तो बन्दरों को आहार न दें, विदेशी शक्तियों के उद्देश्यों की पूर्ति में हाथ बटाएं और सरकारी प्रयास में सहयोग करें। ताकि सड़कों पर सिमट आए बन्दर गांवों में जाकर खेती को उजाड़े, वहां की औरतों बच्चों को आतंकित करें और उनका जीवन दूभर कर दें। आखिर किसान को उसकी जमीन से जुदा करने का काम कोई आसान बात नहीं है। काफी कुछ करना पड़ेगा। तो आप इस में भागीदार बन रहें हैं न? हमारे विदेशी आका तभी तो 10-15 रुपए का आटा 50 या 60 रुपए का बेच पाएंगे। बाकी अनाज की भी यही हालत होगी। अविश्वास करने की नासमझी न करें। मुफ्रत का पानी 10-12 रुपए लीटर लेकर पीने पर वे आपको बाध्य कर सकता है तो और भी बहुत कुछ सम्भव है। इसी दृष्टि से बढ़ते बन्दरों के आतंक और इस पर ढीली-ढाली सरकारी नीतियों को देखें।

1 Comment

  • इंसानों का जूठा खाना / अनाज खाकर बन्दर भी जहरीले होने लगे है. कुत्ते का काटने पर डॉक्टर ३ इंजेक़सन लगाने को कहते है (अगर कुत्ता नहीं मरे तो) किन्तु बन्दर के काटने पर पुरे ५ इंजेक़सन लगाने को कहते है.
    यह बात वाकई सच है की बंदरो की जनसँख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है और वे आक्रामक भी होने लगे है.

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