यूँ तो रत्नों की परंपरा आदिकाल से ही चली आ रही है। दुनियां में जितने भी युग आए ,चाहे वो सत्युग हो द्वापर हो या फिर कलियुग। युग-युगांतर से रत्नों की महत्ता आज भी बरकरार है। समय के साथ सबकुछ बदला, अगर नहीं बदली ,तो वो है रत्नों की मांग। आईए जानते हैं रत्नों के कौन-कौन से प्रकार होते हैं।
रत्नों की शुरुआत करते हैं माणिक्य से। माणिक्य का रंग लाल होता है,वैसे ये गुलाबी,काला,और नीले रंग में भी पाया जाता है। पृथ्वी पर पाए जानेवाले रत्नों में हीरा के बाद सबसे ज्यादा कठोर माणिक्य ही होता है। इसकी खासियत ये है कि इसे अंधेरे कमरे में रखने पर भी प्रकाश होता रहता है।
माणिक्य के बाद मूंगा की बात करते हैं। मूंगा गुलाबी ,काला, लाल और सुनहरे रंगों में पाया जाता है। लेकिन आमतौर पर मूंगे के रंगों के बारे में लाल को ही ज्यादा तवज्जो दी जाती है। ज्योतिशियों के अनुसार लाल मूंगा स्त्रियों के लिए बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है। इस रत्न को धारण करने से मनुश्य के शरीर में साहस और वीरता का संचार होता है।
मोती को चंद्र रत्न की संज्ञा दी गई है। इसका रंग सफेद होता है। हालांकि इसका रंग हल्का पीला और हल्के गुलाबी भी होता है। मोती का निर्माण भी समुद्र के गर्भ में पाए जानेवाले घोंघे से होता है। मोती फारस की खाड़ी,श्रीलंका बेनेजुएला,मैक्सिको,आस्ट्रेलिया तथा बंगाल की खाड़ी में पाए जाते हैं। मोती को पहनने से क्रोध शांत रहता है और मानसिक तनाव को भी दूर भगाता है।
पन्ना बुद्ध ग्रह का प्रतिनिधि रत्न माना जाता है। इसके कई नाम हैं। पन्ना ग्रेनाइट तथा पैग्मेटाइट चट्टानों और दरारों के बीच जन्म लेता है। पन्ना की विशिष्टता है कि इसे आंखों की रोषनी और बुखार की बिमारी में भी पहना जाता है। पन्ना का रंग हरा होता है। यह पारदर्शी और अपारदर्शी दोनों ही तरह का होता है। इसकी पहचान करने का तरीका है लकड़ी पर रगड़ने से इसकी चमक में वृद्धि होती है।
कहा जाता है कि पुखराज बहुत जल्द ही फायदा पहुंचाता है लोगों के जीवन में। यह पत्थर पीला उजला और लाल रंगों में पाया जाता है। इसे ज्यादातर सोने के अंगुठी में ही पहना जाता है। ष्वेत पुखराज ज्ञानवर्द्धक,लाल पुखराज शक्तिवर्द्धक और पीला पुखराज सुख और धनवर्धक माने गए हैं।
नीलम की तो बात ही निराली है। इस रत्न के स्वामी शनि देवता हैं। शनि के कोप को षांत करने के लिए नीलम का धारण बहुत ही उपयोगी माना जाता है। इसका रंग मोर की गर्दन के रंग की तरह होता है। इसे पहनने के पहले बहुत से प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। ज्योतिशियों की मानें तो नीलम का फायदा और नुकसान 24 घंटे के अन्दर ही मालूम पड़ जाता है। नीलम श्रीलंका,बर्मा, और थाईलैंड में बेहतर किस्म के पाए जाते हैं।
गोमेद का रंग पीला और लाल होता है। गोमेद गोमूत्र का ही अपभ्रंष रूप है। यह रत्न श्रीलंका, भारत,थाईदेश ,कंबोडिया,और मैडागास्कर में पाया जाता है। गोमेद का भौतिक गुण ये होता है कि ये चुंबक को अपनी ओर खींच लेता है। ऐसा लोहे और जस्ते के मिश्रण के कारण होता है।
लहसुनियां को केतु का रत्न माना गया है। इसे भी कई नामों से नवाजा गया है- वैदूर्य,विडालाक्ष,केतु रत्न, सूत्र मणि तथा अंग्रेजी में इसे कैट्स आई कहते हैं। लहसुनिया हल्के पीले रंग का होता है। रासायनिक दृश्टि से यह बैरीलियम का एल्युमीनेट होता है। यह विदेशों के अलावे भारत के उड़ीसा में पाया जाता है
अब बात करते हैं सबसे मंहगे रत्न हीरे की। ये काफी मंहगी होती है। इसे एक बार धारण करने के बाद लगभग सात सालों तक इसका प्रभाव रहता है। शुद्ध हीरे को गर्म पानी ,गर्म दूध या तेल में डालने पर यह उसे ठंडा कर देता है। खासकर स्त्रियों के धारण करने से ज्यादा फायदा मिलता है। जिस हीरे के मुख पर लाल या पीला हो उसे पहनने का एक अलग ही महत्व है।
कुल मिलाकर रत्नों की यही परिभाषा है कि इसके वैज्ञानिक और मनौवैज्ञानिक दोनों फायदे हैं। इसीलिए रत्नों का क्रेज आज भी बरकरार है। लोग चांद पर चले गए एक-से-एक खोज होते गए ,लेकिन पत्थर है कि उसका वजूद आज भी उसी तरह से बरकरार है जिस तरह आज से हजारों साल पहले था।
ग्रहों की बात करें तो इसके उपरत्न भी होते हैं। कह सकते हैं कि लगभग हर चीजों के विकल्प होते हैं। चाहे वो खाने-पीने के सामान हो पहनने के कपड़े हो या फिर ग्रहों के काट का हो। आईए देखते हैं इस रिपोर्ट में ग्रहों के कौन-कौन से उपरत्न हैं।
देवताओं और ग्रहों में सूर्य का एक अलग ही महत्व है। दुनियां में हर किसी को सूर्य की आवष्यकता होती है। इसके बिना कुछ भी नहीं है। न ही रात है और न ही दिन। सूर्य के रत्न हैं माणिक्य। और इसके उपरत्न हैं स्टार माणिक, रतवा हकीक,तामड़ा लाल तुरमली।
सूर्य के बाद बात करते हैं चन्द्र की। चन्द्रमा का भी अपना अलग ही महत्व है। हर किसी को षीतलता की आषा और जरूरत होती है। जब भी किसी व्यक्ति को सुकून की जरूरत महसूस होती है ,तो वे चन्द्रमा की कामना करते हैं, कि काश चन्दा के जैसी शीतलता यहां होती ,तो कितना अच्छा होता! इसका रत्न है मोती, और उपरत्न दूधिया हकीक,सफेद मूंगा,चन्द्रकांत मणि,और सफेद पुखराज।
गुरू की तो बात ही निराली है। तभी तो तुलसीदास ने कहा है कि ” मन तड़पत हरि दर्शन को आज,बिन गुरू ज्ञान कहां से पाउं ।” गुरू के रत्न हैं पुखराज। और उपरत्न पीला हकीक,सुनहैला,पीला गोमेद,और बैरूज ।
गुरू के बाद बात करते हैं मंगल की। मंगल से ही मंगलवार का दिन बना है। इस दिन का खास महत्व है। इसके रत्न हैं मूंगा। और उपरत्न लाल हकीक,लाल आनेक्स,तामड़ा,और लाल गोमेद। बहुत से लोग मंगलवार के दिन व्रत रखकर लाल वस्त्र भी धारण करते हैं। धार्मिक दृश्टिकोण से ऐसा माना जाता है कि मंगलवार के दिन लाल वस्त्र पहनने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और जब हनुमान जी खुशहोते हैं तो भगवान राम भी खुश हो जाते हैं।

