Author: दीपाली पाण्डेय
दीपाली पाण्डेय , मूलतः दिल्ली की रहने वाली हैं . दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक हैं . आप अध्ययन के साथ अध्यापन और लेखन का कार्य करती हैं . फिलवक्त जनोक्ति परिवार से जुड़कर अपने पत्रकारीय कर्म में भिड़ी हुई हैं . आपसे संपर्क करने का पता है :
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लोगों में जागरुकता की कमी कई और योजनाओं को फेल कर रही है . सबसे पहले सरकार को शिक्षा व्यवस्था को दुस्रुस्त करना चाहिए तभी जाकर भारत सही मायने में एक लोक्तानता बन पायेगा और जनता लोकतान्त्रिक अधिकारों का सही उपभोग कर सकेगी .
आपकी निम्न टिप्पणी अच्छी लगी-
“सूचना के अधिकार ने शासको और शोषितों का रिश्ता ही बदल दिया है…. आज दूरदराज के आदिवासी इलाकों में बैठा एक अनपढ़ ग्रामीण भी शासको से न सिर्फ सवाल पूछ रहा है बल्कि जवाब न देने की स्थिति में उन्हें दंडित करवाने के कदम भी उठा रहा है। शायद इसलिए यह कानून लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में अभी तक किए गए प्रयासों में सबसे अधिक लोकप्रिय भी बन गय है। आज ऐसे सैकड़ो नहीं, हजारों मामलें है, जहां इस कानून ने शासन प्रक्रिया में आम आदमी की हैसियत बढ़ाई है।”
नौकरशाहों को ठीक किये बिना अभी इस कानून का लाभ उतना नहीं मिल पा रहा है, जितनी जरूरत है. लिखती रहो. शुभकामनायें.
mitro vandemartam,rti act 2005 kanun ke tiht sarkar ke dwara ho rahe vikas karya or sabhi kaam kaj ke byore ko pardarsi kar ne ka uttam hathiyar hai rti ,,lekin dukh ki baat ye hai ki vibhago ke loksuchna adhikari rti ka mjak uda rahe hai,unko koi dar nahi hai rti se ,,eska mukhya karn hai ari act 2005 ,kanun ke kamjor pravdhan …vandemaatram..rti activist ,,,jagdish r purohit rajashthan ..jalor