गौपालकों को भारत की वर्तमान परिस्थियों में अनेकों कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं का एक आयाम गौवंश चिकित्सा है। एलोपैथी चिकित्सा के अत्यधिक प्रचार का शिकार बनकर हम अपनी प्रमाणिक पारम्परिक चिकित्सा को भुला बैठे हैं। परिणामस्वरूप चिकित्सा व्यय बहुत बढ़ गया और दवांओं के दुष्परिणाम भी भोगने पड़ रहें हैं। दवाओं से विषाक्त बने मृत पशुओं का मांस खाकर गिद्धों की वंश समाप्ति का खतरा पैदा हो गया है।
जरा विचार करें कि इन दवाओं के प्रभाव वाला दूध्, गोबर, गौमूत्रा कितना हानिकारक होगा। इन दवाओं के दुष्प्रभावों से भी अनेकों नए रोग लगते हैं, जीवनी शक्ति घटती चली जाती है।
दूध् बढ़ाने के लिये दिए जाने वालो ‘बोविन ग्रोथ हार्मोन’ या ‘आक्सीटोसिन’ आदि के इंजैक्शनो से अनेक प्रकार के कैंसर होने के प्रमाण मिले हैं । इन इंजैक्शनों से दूध् में आई जी एफ-1 ;इन्सुलीन ग्रोथ फैक्टर-1 नामक अत्यधिक शक्तिशाली वृद्धि हार्मोन की मात्रा सामान्य से बहुत अधिक बढ़ जाती है और मुनष्यों में , स्तन, कोलन, प्रोस्टेंट, फेफड़ो, आतों, पैक्रिया के कैंसर पनपने लगते हैं।
इलीनोयस विश्वविद्यालय के ‘डा. सैम्यूल एपस्टीन’ तथा ‘नैशनल इंस्टीटयुट’ आॅफ हैल्थ;अमेरीकाद्ध जैसी अनेक संस्थाओं और विद्वानों ने इस पर खोज की है।
ध्यान दें कि जिस हार्मोन के असर से मनुष्यों को कैंसर जैसे रोग होते हैं उनसे वे गाय-भैंस गम्भीर रोगो का शिकार क्यों नही बनेगे ? आपका गौवंश पहले 15-18 बार नए दूध् होता था, अब 2-4 बार सूता है। गौवंश के सूखने और न सूने का प्रमुख कारण दूध् बढ़ाने वाले हार्मोन हैं। आज लाखों गउएं सड़कों पर भटक रही हैं और उनका दूध् सूख गया है तो इसका बहुत बड़ा कारण ये दूध् बढाने वाले हारमोन हैं, इसे समझना होगा।


पश्चिम का अन्धानुकरण करेंगे तो ये सारी दिक्कत और बिमारी तो आएगी ही. अमेरिका में ऐसे ‘काव फार्म’ की संखा बढ़ रही है जहाँ कोई ग्रोथ हारमोन का प्रयोग नहीं होता और गायों को प्राकृतिक घास, चारा ही खिलाया जाता है.
कई रिसर्च ने सिद्ध कर दिया है की दूध या गाय के चारे में किसी प्रकार का छेड-छड घातक है.
राकेश जी, आपकी जानकारी सही है. अमेरिका अपने देश में लगातार ‘ए-२’ प्रकार की गौओं को बढ़ा रहा है और भारत में ‘ए-१’ प्रकार के कैंसर कारक गो वंश को बढाने के लिए सहायता दे रहा है. हमारे शासक और सरकार अमेरिका की बताई विनाशकारी नीतियों पर चल रही है. जनता को सरकार का भरोसा छोड़ कर अपने और देश के हित में स्वयं कार्य करना होगा.