भारतीय संसद अभी 60 वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘ क्या खोया क्या पाया ‘ का हिसाब लगा ही रहा था कि लोकसभा में बुधवार को अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब सत्तारूढ पक्ष की बेंचें बिल्कुल खाली नजर आई।
यह चाटा नहीं, आने वाली जनक्रांति का आगाज़ है। अब भी सम्हल जाओ सत्ता पर आसीन राजनेतावों, यह कुर्शी तुम्हारे पुरखों कि नहीं है, यह जनता कि कुर्शी, समय रहते उसकी आवाज़ को पहचानो। जनता से तुम हो। तुमसे जनता नहीं है।
यह चाटा नहीं, आने वाली जनक्रांति का आगाज़ है। अब भी सम्हल जाओ सत्ता पर आसीन राजनेतावों, यह कुर्शी तुम्हारे पुरखों कि नहीं है, यह जनता कि कुर्शी, समय रहते उसकी आवाज़ को पहचानो। जनता से तुम हो। तुमसे जनता नहीं है।