पिछली सदी के महान विचारक तथा आध्यात्मिक नेता श्री रजनीश ओशो ने प्रचलित धर्मों की व्याख्या की तथा प्यार, ध्यान और खुशी को जीवन के प्रमुख मूल्य बताया । ओशो रजनीश (११ दिसम्बर, १९३१ – १९ जनवरी १९९०) का जन्म भारत के मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। वे रजनीश चन्द्र मोहन से आचार्य रजनीश के नाम से ओशो रजनीश नाम से जाने गये। दुनिया को एकदम नए विचारों से हिला देने वाले , बौद्धिक्जागत में तहलका मचा देने वाले भारतीय गुरु ओशो से पश्चिम की जानता इस कदर प्रभावित हुई कि भय से अमेरिकी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करवा दिया था |
ओशो ने सैकडों पुस्तकें लिखीं, हजारों प्रवचन दिये। उनके प्रवचन पुस्तकों, आडियो कैसेट तथा विडियो कैसेट के रूप में उपलब्ध हैं। अपने क्रान्तिकारी विचारों से उन्होने लाखों अनुयायी और शिष्य बनाये। अत्यधिक कुशल वक्ता होते हुए इनके प्रवचनों की करीब ६०० पुस्तकें हैं। लेकिन संभोग से समाधि की ओर इनकी सबसे चर्चित और विवादास्पद पुस्तक है। इस किताब को आज भी लोग पढ़ते हैं तो उनको सलाह दी जाती है कि पढो पर ऐसा मत करना ! दरअसल , यही ओशो के विचारों का डर है जो तब भी समाज में था और आज भी है ! काजल की कोठरी में रहते हुए काजल लग जाने का डर और ओशो मानव को उसी काजल की कोठरी से अंतर्मन को जगाने की बात करते हैं |
ओशो ने हर एक पाखंड पर चोट की। ओशो ने सम्यक सन्यास को पुनरुज्जीवित किया है। ओशो ने पुनः उसे बुद्ध का ध्यान, कृष्ण की बांसुरी, मीरा के घुंघरू और कबीर की मस्ती दी है। सन्यास पहले कभी भी इतना समृद्ध न था जितना आज ओशो के संस्पर्श से हुआ है। इसलिए यह नव-संन्यास है। उनकी नजर में सन्यासी वह है जो अपने घर-संसार, पत्नी और बच्चों के साथ रहकर पारिवारिक, सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए ध्यान और सत्संग का जीवन जिए। उनकी दृष्टि में एक संन्यास है जो इस देश में हजारों वर्षों से प्रचलित है। उसका अभिप्राय कुल इतना है कि आपने घर-परिवार छोड़ दिया, भगवे वस्त्र पहन लिए, चल पड़े जंगल की ओर। वह संन्यास तो त्याग का दूसरा नाम है, वह जीवन से भगोड़ापन है, पलायन है। और एक अर्थ में आसान भी है-अब है कि नहीं, लेकिन कभी अवश्य आसान था। वह सन्यास इसलिए भी आसान था कि आप संसार से भाग खड़े हुए तो संसार की सब समस्याओं से मुक्त हो गए। क्योंकि समस्याओं से कौन मुक्त नहीं होना चाहता? लेकिन जो लोग संसार से भागने की अथवा संसार को त्यागने की हिम्मत न जुटा सके, मोह में बंधे रहे, उन्हें त्याग का यह कृत्य बहुत महान लगने लगा, वे ऐसे संन्यासी की पूजा और सेवा करते रहे और सन्यास के नाम पर परनिर्भरता का यह कार्य चलता रहा : सन्यासी अपनी जरूरतों के लिए संसार पर निर्भर रहा और तथाकथित त्यागी भी बना रहा। लेकिन ऐसा सन्यास आनंद न बन सका, मस्ती न बन सका। दीन-हीनता में कहीं कोई प्रफुल्लता होती है ? धीरे-धीरे सन्यास पूर्णतः सड़ गया। सन्यास से वे बांसुरी के गीत खो गए जो भगवान श्रीकृष्ण के समय कभी गूंजे होंगे-सन्यास के मौलिक रूप में। अथवा राजा जनक के समय सन्यास ने जो गहराई छुई थी, वह संसार में कमल की भांति खिल कर जीने वाला सन्यास नदारद हो गया।
ओशो के बारे में , उनके विचारों के संबंध में जितना लिखा जाए कम पड़ता है | यदि आप भी ओशो के विचारों को जानना चाहते हैं तो नीचे दिए गये लिंक पर जाकर ओशो की किताबें हिंदी में डाउनलोड करें और ओशो के आध्यात्मिक विचारों का रसास्वादन करें |


Osho was, Osho is, Osho will a great philosopher on the EARTH…….
smabhog se smadhi ki or..this book is not given here
would love to download these. Thanks
osho is solution of every problm in lyf. he tells us about the way to get rid of problms.
you are right harsh kapoor i agree with you
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I like the inspirational and motivational true writings of Osho. I am also collecting the experiences of life and trying to see ups and downs of life through Gurus eyes.
THANK YOU FRIEND I AM HAPPY TO READ ALL BOOKS YOU PROVIDE HERE.YOU DO A GOOD JOB.
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करीब बीस साल पहले ओशो की किताबें पढ़ने की शुरुआत हुई थी… कुछ चंद किताबों ने ही मेरी सोच और व्यक्तित्व मे आमूल परिवर्तन कर दिया… ऐसा निरपेक्ष विचारक आज विश्व की आवश्यकता है