एक के बाद एक हो रहे रेल हादसों ने मन को व्यथित कर दिया है ! रेलमंत्री जी इस सवाल पर बिना कोइ जवाब दिए निकल जा रही हैं ! अगर यही हाल रहा तो कुछ दिन में लोग ट्रेन से सफ़र करना छोड़ देंगे ! ये रेल हादसे कोइ इत्तेफाक नहीं हैं ! इन हादसों के पीछे बुनियादी कारण हैं ……जागरण में छपी एक खबर के अनुसार रेलवे विभाग ड्राईवरों कि कमी झेल रहा है ! रेलवे विभाग में ड्राईवरों के ७६००० पद स्वीकृत हैं लेकीन अभी अत्यावश्यक ६२३२० पदों से ही काम चलाया जा रहा है, १३६८० पद अभी भी खाली हैं ! बात सिर्फ ड्राईवरों तक ही हो तब न इनके अलावा रेलवे के अन्य महकमो में भी रिक्त पदों की भरमार है ! रेलवे के १६ जोनो में इस समय कुल 1,68,१०९ कर्मचारियों के पद रिक्त हैं ! सर्वाधिक १९०१३ पद उत्तर रेलवेमें रिक्त हैं ! पूर्व मध्य रेलवे १७०४२ पदों का अभाव झेल रहा है ! पूर्व रेलवे में १२७३३ कर्मचारियों कि कमी है और पिछले साल दुर्घटनाओं का गढ़ रहे उत्तर मध् रेलवे ९०४५ कर्मचारी पद रिक्त हैं ! किसी भी विभाग की रीढ़ होते हैं उसके कर्मचारी, रेलवे जैसे विभाग के लिए तो विशेषकर जिसके ऊपर प्रतिदिन लाखों करोड़ों लोगों को उनके स्थान से सही-सलामत उनकी मंजिल तक पहुँचाने कि जिम्मेदारी है ! ऐसे अत्यंत संवेदनशील विभाग के पास तो जरुरत से थोड़े ज्यादा ही कर्मचारी होने चाहिए जिससे हर कर्मचारी को पूरा आराम मिल सके और वो तरोताजा होके अपना काम करे रेलवे में ड्राईवरों के लिए नियम भी है कि जरुरत से ३०% अधीक ड्राईवर रखे जाएँ पर यहाँ तो आंकड़ा ही दूसरा है ! जिस {रेल} विभाग में कर्मचारियों कि यह दशा होगी वहां हादसे नहीं होंगे तो क्या होगा शायद यही कारण है कि माननीय रेलमंत्री जी हादसों के ऊपर सवाल पूछे जाने पर बिना कोइ जवाब दिए चली जाती हैं ! कोइ जवाब हो तब न दे जनता के सामने इस मामले में वो निरुत्तर हैं ! मगर इस तरह चुप्पी साधने से कुछ नहीं होने वाला उन्हें इस मामले में अपनी विफलता को स्वीकार करना चाहिए और इस समस्या का समाधान ……….अन्यथा क्या अर्थ है रेलमंत्री के होने का

