कभी ऐसा होगा कि इस भ्रष्ट्र समाज में कोई कमल खिल पायेगा ? भ्रष्टाचार सामाजिक बुराई के साथ-साथ सामरिक चिंता का विषय बना हुआ है . जिससे हम सब भली -भातिं परिचित होते हुए भी खामोश हैं , आखिर क्यों ? अफ़सोस तो तब होता है जब हम खुद इस कार्य को अंजाम देते हैं . मन में विचार आता है कि भ्रष्टाचार को लेकर भारतीय लोग इतने सहनशील क्यों हैं ? हम तो भविष्य के लिए चिंतित हें ,भ्रष्टाचार पर चर्चा में हमारा खुद का आचरण कितना सही है , इसका अहसास होना खुद एक चिंता का विषय है . एक तरफ वर्षों से भ्रष्टाचार का अध्ययन हो रहा है और दूसरी तरफ यह मर्ज बढता जा रहा है . शासन व्यवस्था की जितनी आलोचना करते हैं ,शासन में सम्बंधित अधिकारी भ्रष्टाचार को उतने ही उत्साह से गले लगाते हैं .हर कोई किसी दफ्तर में अपना कार्य शीघ्र करवाने के लिए सामने वाले को बंद लिफाफा सहज में थमाने को तैयार है . 100 में से 80 आदमी आज इसी तरह कार्य करवाने के फिराक में है. और जब एक बार किसी को अवैध ढंग से ऐसी रकम मिलने लग जाये तो निश्चित ही उसकी तृष्णा बढ़ती हीं जाएगी . उसी बढ़ते लालच का परिणाम आज सारा भारत भोग रहा है। भ्रष्टाचार में सिर्फ शासकीय कार्यालयों में लेने देनेवाले घूस को ही शामिल नहीं किया जा सकता बल्कि इसके अंदर वह सारा आचरण शामिल होता है जो एक सभ्य समाज के सिर को नीचा करने में मजबूर कर देता है। भ्रष्टाचार के इस तंत्र में आज सर्वाधिक प्रभाव राजनेताओं का ही दिखाई देता है . इसका प्रत्यक्ष प्रमाण तो तब देखने को मिला जब नागरिकों द्वारा चुने हुए सांसदों के द्वारा संसद भवन में प्रश्न तक पूछने के लिए पैसे लेने का प्रमाण कुछ टीवी चैनलों द्वारा प्रदर्शित किया गया . कभी ताबूत घोटाला, कभी चारा घोटाला, कभी दवा घोटाला, कभी बोफोर्स घोटाला तो कभी खाद घोटाला आखिर ये सब क्या इंगित करता है ! ये सारे भ्रष्टाचार के एक उदाहरण मात्र हैं। आज इससे सारा देश संत्रस्त है .भ्रष्टाचार ने सारे देश को अपनी आगोश में ले लिया है . वास्तव में भ्रष्टाचार के लिए हमारा सारा तंत्र जिम्मेदार है . हर वर्ष सरकार नयी नीतियों का निर्माण करती है परन्तु सभी नीतियाँ , योजनायें फाइलों में धरी की धरी रह जाती है . गरीबी उन्मूलन और राष्ट्रीय रोजगार गारंटी जैसी योजनाओं का बंटाधार हो जाता है.
एक रिपोर्ट के अनुसार, बीपीएल परिवारों और ग्यारह बेसिक सर्विसेज के अध्ययन पर आधारित सीएमएस ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की 2007 की रिपोर्ट विचलित करने वाली है. यह रिपोर्ट बताती है कि कल्याण योजनाओं से लाभान्वित होने वाले एक तिहाई बीपीएल परिवारों को कानूनसम्मत सेवाएँ हासिल करने के लिए रिश्वत देना पड़ती है. लगभग सभी राज्यों में अन्य विभागों की अपेक्षा पुलिस तंत्र भ्रष्ट्र है . यह अत्यंत निंदनीय स्थिति है और इसका प्रभाव सामाजिक आधार को ही खोखला कर रहा है . वहीँ दूसरी तरफ , ” कैश फॉर वोट” प्रकरण की अभी भी जाँच चल रही है ! झामुमो रिश्वतकांड में शामिल सांसद विशेषाधिकारों की आड़ में भ्रष्टाचार के आरोपों से सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुक्त किए जा चुके हैं ! सांसदों को विशेषाधिकार प्रदान करने वाले कानूनों में संशोधन क्यों नहीं किया जाता ? शयाद इसीलिए क्योंकि किसी भी पार्टी का सांसद धन प्राप्ति के स्रोतों की बारीकी से जाँच का सामना करना नहीं चाहता है और ऐसे ज्यादातर स्रोत संदेहास्पद होते हैं जिन्हें सांसदों का संरक्षण प्राप्त होता है.
बात करें भारत को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए तो जिन लोगों को आगे आकर भ्रष्टाचार को समाप्त करने का प्रयास कर समाज को दिशा निर्देश देना चाहिए वे स्वयं ही भ्रष्ट आचरण में आकंठ डूबे दिखाई देते है . वास्तव में देश से यदि भ्रष्टाचार मिटाना है तो ने सिर्फ साफ स्वच्छ छवि के नेताओं का चयन करना होगा बल्कि लोकतंत्र के नागरिको को भी सामने आना होगा. हमें भ्रष्ट लोगों को समाज से न सिर्फ बहिष्कृत करना होगा बल्कि उच्चस्तर पर भी भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों का बायकॉट करना होगा. अपनी आम जरूरतों को पूरा करने एवं शीघ्रता से निपटाने के लिए बंद लिफाफे की प्रवृत्ति से बचना होगा. कुल मिला जब तब लोकतंत्र में आम नागरिक एवं उनके नेतृत्व दोनों ही मिलकर यह नहीं चाहेंगे तब तक भ्रष्टाचार के जिन्न से बच पाना असंभव ही है .


March 6, 2010 at 11:40 pm
जैसा राजा वैसी प्रजा । भगवद्गीता में कहा है -” यद्यद्याचरते श्रेष्ठस्तदतदेवेतरो जना:, स यत प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते”- अर्थात श्रेष्ठ लोग (वर्तमान सन्दर्भ में नेता ) जैसा आचरण करते हैं उसी का अनुकरण जनता भी करती है । शुक्र नीति में भी कहा है- “आचार प्रेरको राजा ….”।
अच्छाई व बुराई दोनों सामान्यतया शासक वर्ग से ही उत्पन्न होती हैं । क़ानून की वास्तविक शक्ति अधिनियम के कठोर प्रावधानों में नहीं होती । अपितु, यह बात अधिक महत्वपूर्ण होती है कि क़ानून की रगों में किसका रक्त प्रवाहित हो रहा है और इसके पोषणकर्ता, व्याख्याता तथा प्रयोक्ता कौन हैं ।
March 4, 2010 at 10:33 pm
Uplifting of basic character of the citizens is the key to eliminate corruption. Reforms must begin right from the primary school education. The basic education must imbibe high values and morals, teachers and parents should take the responsibility