२८ अगस्त २०१० गुडगाँव में अंततः कॉमनवेल्थ के थीम गाने को दुनिया के सामने तमाम ताम-झाम के साथ लॉन्च कर दिया गया है. कॉमनवेल्थ थीम गाना ‘स्वागतम’ ऑस्कर विजेता ऐ आर रहनाम ने बनाया है. ‘जियो उठो बढ़ो जीतो’ गाना स्वयं ऐ आर रहनाम ने गाया है. यह गाना महात्मा गांधी को समर्पित किया गया है. गाने की पहली पंक्ति इस प्रकार है – ‘ओ यारों ये इंडिया बुला लिया, ओ दीवानों ये इंडिया बुला लिया’. गाने के बोल हिंदी और अंग्रेजी दोनों में है यानी ‘हिंगलिश’ में. गाने के संयोजन में फ्यूजन का मिश्रण बखूबी देखने को मिलता है. रॉक, जैज, हिप-होप के साथ गाने की प्रस्तुति की गयी. कुल मिलाकर इस थीम सॉंग को एक रीमिक्स गाने के रूप में देखा जा सकता है. सिर्फ हिंदी शब्दों के अलावा यह थीम सॉंग कहीं से भी अद्भुत भारत की तस्वीर प्रस्तुत नहीं करता. निश्चय ही ऐ आर रहनाम ने उम्दा संगीत दिया है परन्तु संगीत और संयोजन में भारतीयता की झलक नहीं मिलती. गाने के बोल न तो वो जोश पैदा करते हैं और न ही कर्णप्रिय प्रतीत होते हैं.
उल्लेखनीय है की १९८२ एशियाड गेम्स थीम सॉंग में भी ‘स्वागत’ को ही प्रमुख विषय बनाया गया था जिसे भारतीय सँगीत की शास्त्रीय परँपरा के वाहक पण्डित रवि शँकर जी ने सँयोजित किया था. गाने के बोल थे “स्वागतम्` शुभ स्वागतम्` आनँद मँगल मँगलम, नित प्रियम्` भारत भारतम “. यह गाना काफी उम्दा और स्तरीय था जिसमे भारतीय संस्कृति परिलक्षित होती है. ऐ आर रहनाम १९८०-९० के दशक के गाने ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ से भी प्रेरणा ले सकते थे जिसमे सारा भारत झलकता है. रहमान के अनुसार ‘स्वागतम’ गाना फीफा वर्ल्ड कप २०१० के गाने ‘वक्का वक्का’ जिसे शकीरा ने गाया है से कहीं ज्यादा लोकप्रिय होगा. रहमान शायद यह भूल गए की दक्षिण अफ्रीका ने फीफा वर्ल्ड कप २०१० थीम सॉंग को अंग्रेजी के साथ-साथ अपनी भाषा में भी तैयार किया था.
राष्ट्रमण्डल खेल ओलंपिक और एशियाड के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बहुखेल खेल प्रतियोगिता है. इस वर्ष दिल्ली में हो रहे राष्ट्रमण्डल खेल में ७२ देश भाग लेंगे. जाहिर है यह एक बहुत बड़ा मंच है अपनी संस्कृति और पहचान को दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करने का. परन्तु हम मेहमानों का स्वागत भी उन्ही की संस्कृति को ध्यान में रख कर कर रहे हैं. लगता है हमारी सभ्यता-संस्कृति भी आज विकास के युनिलियर मॉडल का अनुसरण करने लगी है जिसमे विकसित देशों के फोर्मुले द्वारा ही अपना विकास किया जाता है. इससे हमारी मूल पहचान नष्ट हो रही है. जब इतने बड़े खेल आयोजन की मेजबानी से हम दुनिया को यह बता रहे हैं की भारत महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है तो क्यों न हम उन्हें अपनी संस्कृति से भी परिचित कराएं. २००८ ओलंपिक गेम्स से भारत को चीन से यह सीख लेनी चाहिए की ऐसे आयोजन में अपनी संस्कृति का कैसे प्रचार-प्रसार किया जाता है. खैर जो भी हो हम यह दुआ करेंगे की राष्ट्रमण्डल खेल का आयोजन सफलतापूर्वक हो जाए तो ये ही बहुत है.




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