यूपीए-2 सरकार की चुनौतियां
अब यूपीए-2 की सरकार चुनावी भावभंगिमा में नजर आ रही है. लिहाजा सरकार के समक्ष कई चुनौतियां है. मंहगाई सबसे बड़ी चुनौती है यूपीए-2 सरकार की क्योंकि इससे आम आदमी त्रस्त है और हार-जीत के लिए आम आदमी का वोट निर्णायक होता है. इसी माह के आंकड़े के अनुसार खूदरा मंहगाई दर 10 % के आसपास बनी हुई है. मंहगाई पर अंकुश लगाना यूपीए सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है.
दूसरी सबसे बड़ी चुनौती →आगे पढ़ें .. यूपीए-2 से आम आदमी त्रस्त है
यूपीए-2 सरकार की चुनौतियां
अब यूपीए-2 की सरकार चुनावी भावभंगिमा में नजर आ रही है. लिहाजा सरकार के समक्ष कई चुनौतियां है. मंहगाई सबसे बड़ी चुनौती है यूपीए-2 सरकार की क्योंकि इससे आम आदमी त्रस्त है और हार-जीत के लिए आम आदमी का वोट निर्णायक होता है. इसी माह के आंकड़े के अनुसार खूदरा मंहगाई दर 10 % के आसपास बनी हुई है. मंहगाई पर अंकुश लगाना यूपीए सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है.
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आज बहुत दिनों के बाद पुराने लोहे वाले पुल से चांदनी चौक जा रहा था। दिल्ली की तरफ से आने वाला मार्ग पुलिस ने अवरुद्ध किया हुआ था। काफी बड़ी संख्या में पुलिस गारद वहां पर थी। लोग रुक कर माजरा समझने की कोशिस कर रहे थे। इस कारण पुल पर काफी भीड़ इकट्ठी हो गई थी। ट्रैफिक जाम हो रहा था , मै वगैर रुके अपने गंतव्य की ओर बढ़ गया।
पुल से नीचे यमुना का जल काले से रंग का दिख रहा था। आज से ३२ साल पहले
राजनीतिक अराजकता और तिकड़बाजी के इस युग में मैं ( एक आम आदमी ) अपनी उलझनों के जवाब खोज रहा हूँ । देश में मेरे उत्थान के नित्य नए संकल्प लिए जा रहे हैं लेकिन मैं अपने आप को घोर उदासी में घिरा पाता हूँ । आस्था का संकट तो है ही साथ ही एक नैतिक उलझन भी है कि जिस रास्ते पर सब चल रहे हैं, क्या वही एकमात्र सुखद रास्ता रह गया है ? मैं कोई आध्यात्मिक बात नहीं कर रहा और कर भी नहीं सकता " भूखे भजन ना होहीं
नरेंद्र मोदी को लेकर आज सारे देश में चर्चा आम हो चली है | लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में मोदी की सभाएं किसी ना किसी मंच के माध्यम से हो रही है | छत्तीसगढ़ के चुनावी अभियान में विकास यात्रा पर निकले मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के साथ राजनांदगांव की सभा में उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में गुजरात से भी आगे चला जाएगा छत्तीसगढ़ | मोदी के भाषण की कुछ खास बातों
हाल में 'शारदा' चिट फण्ड कम्पनी का घोटाला उजागर होने के बाद से (राँची से प्रकाशित) एक अखबार धारावाहिक रुप से "चिट फण्ड कथा" प्रकाशित कर रहा है, जिसमें इस तरह की विभिन्न कम्पनियों के कच्चे चिट्ठे खोले जा रहे हैं। इसकी 17-18 किस्त प्रकाशित हो चुकी है और आगे भी, लगता है, यह कथा जारी रहेगी। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि धोखेबाज चिट फण्ड कम्पनियों का मकड़जाल कितना बड़ा है। सरसरी निगाह से देखने
मित्रों,काफी दिन पहले मैंने प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित होनेवाली मासिक पत्रिका बाल भारती में एक बाल कहानी पढ़ी थी। एक राज्य में वयोवृद्ध राजा की मृत्यु के बाद उसका युवा पुत्र राजा बना। वह बड़ा दानी और दयालु था। दोनों हाथों से दान करता। उसके राज्य में कोई भी दुःखी नहीं था सिवाय वृद्ध मंत्री के। धीरे-धीरे खजाने में राजस्व वसूली घटने लगी और खजाना खाली हो गया। दुःखी राजा ने मंत्री से
जब 1990 में बिहार में सवर्णों की बदस्तूर हूकूमत के तिलस्म को तोडकर जब पिछड़ी जाति के बिलकुल आम परिवार से आनेवाले लालू सत्ता पर काबिज हुए तो यह एक अद्भुत दृश्य था। परंतु बीतते समय के साथ लालू परिवारवाद में घिरने लगे। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो लालू यादव के साले साधु यादव और सुभाष यादव ने ही बिहार के प्रशासनिक तंत्र को विफल किया। इन दोनों ने प्रदेश में अपहरण, फिरौती और डकैती को संस्थागत
भद्रजनों का खेल एक बार पुनः फिक्सिंग की जद में आकर प्रशंसकों को बड़ा झटका दे गया है। और तो और अब इस पूरे आयोजन पर भी सवालिया निशान उठाये जा रहे हैं। और ऐसा हो भी क्यूं न? आईपीएल-६ में स्पॉट फिक्सिंग का भंडाफोड़ करते हुए दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि इस मामले में तीन क्रिकेटर क्रमशः अंजीत चंदीलिया, एस श्रीशांत और अंकित चव्हाण उसके रडार पर थे और ये क्रिकेटर बुकीज के सीधे संपर्क में थे।
वन्दे मातरम् को लेकर इन दिनों फिर से बहस जोरों पर है | इसी सन्दर्भ में पत्रकार देवाशीष प्रसून द्वारा फेसबुक पर की गयी टिप्पणी को हम यहाँ साभार प्रकाशित कर रहे हैं -
जनोक्ति डेस्क |
जिसे जो मन करे गाये, न करे, न गाये… यह कोई इश्यू नहीं है, लेकिन अकारण किसी को बदनाम करना प्रगतिशीलता नहीं हो सकती है। प्रगतिशीलता … तार्किकता, संवेदनशीलता और सम्यक समझदारी के व्यावहारिक प्रयोग का नतीजा होती
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26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक भाषा से सम्बन्धित उपबन्धों का विवेचन किया गया है। अनुच्छेद 343 के अनुसार भारत की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी निर्धारित की गयी है। और साथ में इस धारा के उप विन्दु 2 में कहा गया है कि ”किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान के प्रारंभ से पन्द्रह वर्ष की अवधि तक संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग
गर्मी के मौसम लालू दिखे गरम | नीतीश पर जमकर बरसे | भाषण में कोई नया एजेंडा नहीं दिखा | लालू के बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी यादव की लाऊंचिंग | राबड़ी देवी भी नीतीश को कोसती दिखी |
अरे....नीतीश 1
अपने चिर परिचित गंवई अंदाज के लिए मशहूर लालू ने आज परिवर्तन रैली के मंच से नीतीश सरकार पर सीधा हमला किया। बार-बार अरे.....नीतीश का उवाच कर उन्होने नीतीश कुमार को खुली चुनौती दी। हालांकि अत्यधिक गर्मी के
पशुओं के वध पर अदालत की सख्ती के बाद गोवा के चर्च ने सरकार से ईसाइयों और मुस्लिमों के लिए गोमांस की जरुरी व्यवस्था करने की मांग की है। चर्च ने गोमांस को लेकर अदालत द्वारा लगाई गई कठोर पाबंदियों को अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए गोवा सरकार की धर्मनिरपेक्ष छवि पर पर भी सवाल उठा दिए हैं।
रोमन कैथोलिक चर्च की सामाजिक शाखा ‘सोशल जस्टिस एंड पीस काउंसिल’ के कार्यकारी
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