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मुंबई से अमेरिका तक ……
जयराम "विप्लव"
वैश्वीकरण के इस दौर में जब दुनियां एक गांव बनने जा रही है तब ” आउट सोर्सिंग ” जैसे शब्द हम भारतीयों के लिए बेमानी है। एक ओर ओबामा आउट सोर्सिंग बंद करने के लिए अमेरिकी कंपनियों में टैक्स में छूट की घोषणा कर रहे है। तो दूसरी तरफ हमारे ही देश में महाराष्ट्र सरकार [...]...
Continue reading full story (read 73 views times) Add a Comment - 4 users commented on this postहे नपुंसक प्रतिनिधियों के जन्मदाता अर्थात मतदाता
जयराम "विप्लव"
लद्दाख के सीमावर्ती गाँव चुशूल (समुद्र तल से चौदह हजार दो सौ तीस फीट की ऊंचाई ) के पास का रजान्गला दर्रे का युद्ध संसार के सर्वाधिक असाधारण और अप्रतिम युद्धों में शुमार है . 62 की लड़ाई में इस मोर्चे पर भारत जीता था . उस समय 17 हजार से 19 हजार फीट की उंचाई [...]...
Continue reading full story (read 104 views times) Add a Comment - 2 users commented on this postबंद कमरे में कलम घिसने वाले पत्रकार नहीं थे प्रभाष जोशी
जयराम "विप्लव"
प्रभाष जोशी से मेरी जान-पहचान पुरानी ना सही पर तीन बरसों में कार्यक्रमों के दौरान हुई कुछ एक मुलाकातों का असर गहरा जरुर है .दिल्ली जैसे महानगर में प्रभाष जी का ठेठपन मेरे जैसे कितने गंवई इंसानों को उनके करीब चुम्बक की भांति खींच लाता था .जनसत्ता हो या तहलका उनके आलेखों को पढ़कर [...]...
Continue reading full story (read 26 views times) Add a Comment - 2 users commented on this postआपकी कोशिश अन्यों से अच्छी है और प्रशंसा योग्य भी है
जनोक्ति डेस्क
" पाठक उवाच " की इस कड़ी में 'जनोक्ति के उद्देश्य' के ऊपर भोपाल से प्रमोद ताम्बट जी के द्वारा भेजे गये निजी मेल को शामिल किया जा रहा है . भाई जयराम जी, आपका मेल मिला मगर ''जनोक्ति'' के पक्ष में कही आपकी हर बात से सहमति प्रकट करना मुश्किल है। वर्ग विभाजित समाज में प्रत्येक [...]...
Continue reading full story (read 6 views times) Add a Comment - 0 users commented on this postशिक्षा के व्यापार को बंद करे सरकार :पाठक उवाच
जयराम "विप्लव"
प्रिय ,पाठक बंधुओं अपने सम्पादकीय स्तम्भ 'संपादक उवाच ' के अर्न्तगत हमने एक नया कॉलम 'पाठक उवाच' का श्रीगणेश किया है जिसमें विभिन्न मुद्दों पर आपकी राय ,आपके विचारों को शामिल किया जायेगा .'पाठक उवाच ' की पहली कड़ी में पेश है ,शिक्षा के व्यापारीकरण के मुद्दे पर "जनोक्ति " के नियमित पाठक चन्द्र सिंह [...]...
Continue reading full story (read 9 views times) Add a Comment - 0 users commented on this postराहुल बाबा आये तो सही पर, क्या लाये हो हमारे लिए ?
जयराम "विप्लव"
गरीब के घर भी मेहमान आता है तो अपनी हैसियत के हिसाब से कुछ न कुछ उपहार जरुर ले आता है . आजकल दलित बस्तियों में एक राष्ट्रीय मेहमान खाली हाथ आता है , चंद चिकनी -चुपड़ी बातें करता है , फोटो खिंचवाता है और फ़िर चला जाता है . देश की तक़दीर बदलने वाले [...]...
Continue reading full story (read 779 views times) Add a Comment - 14 users commented on this postराजनीतिक वेश्यावृत्ति की शुरुआत तो सन 90 में ही हो गयी
जयराम "विप्लव"
भारत की संसद को गाँधी ने 1909 ई० में हीं बाँझ और वेश्या बताया था .धीरे -धीरे वेश्यावृत्ति के पावन कर्म में अपनी राजनीति भी शामिल हो गयी जो अब भारत को कुछ नया दे सकने की हालत में नहीं है . राजनीति का यह चाल -चलन तो 1990 से ही वैधानिक मान्यता पाने को [...]...
Continue reading full story (read 402 views times) Add a Comment - 8 users commented on this postवैचारिक स्खलन के दौर में अंतरजाल पर बौद्धिक जगत
जयराम "विप्लव"
जब विचारों को किसी वाद या विचारधारा का प्रश्रय लेकर ही समाज में स्वीकृति मिलने का प्रचलन बन जाए तब व्यक्तित्व का निर्माण संभव नही. आज यही कारण है कि भारत या तमाम विश्व में पिछले ५० वर्षो में कोई अनुकरणीय और प्रभावी हस्ताक्षर का उद्भव नही हुआ. वाद के तमगे में जकड़ी मानसिकता अपना [...]...
Continue reading full story (read 175 views times) Add a Comment - 3 users commented on this post



