नई प्रविष्टियाँ
- शठे शाठ्यम समाचरेत्
- हम कितने मूर्ख हैं ?
- महिलाओं में सुधार की गति दावों के मुकाबले बहुत धीमी
- क्या मिल पाएगी छात्र राजनीति को नई दिशा
- अब परदेश नहीं जाना
- एक भिखमंगा और एक गाँधीवादी – दोनों लतखोर…
- राजनीति से नहीं, राजनैतिक दलों से सावधान रहें छात्र
- कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्
- क्या बाघों के राबिनहुड बने जयराम रमेश मानवमात्र के हितो की ओर भी देखेंगें?
- डूसू : राजनीति का प्रवेश द्वार
- छात्र आन्दोलन में छात्राओं की सहभागिता
- फ़िर से फिक्सिंग
- कवि हेमंत शेष को डॉ घासीराम वर्मा पुरस्कार
- बड़ा लेखक बनने के गुर
>> << अंधेर नगरी
भारतनामा
एक भिखमंगा और एक गाँधीवादी – दोनों लतखोर…
न तो कभी पलटकर यह पूछता है कि “आखिर तू भिखारी क्यों रह गया? और इतने साल से भीख ही माँग रहा है तो आखिर वैसा कब तक बना रहेगा? क्या कभी अपने पैरों पर खड़ा होना भी सीखेगा?”, और न ही उस भिखारी को दो लात जमाकर मोहल्ले से बाहर करता है
राजगुरू के जन्म दिवस पर विशेष
आजादी की लड़ाई के हर मौके पर अपनी सहभागिता करने के लिए बेचैन रहने वाले,इस लड़ाई में जान देने व लेने का कोई अवसर हाथ से जाने न देने के… Read more
विमर्श/सुझाव/अभियान
महिलाओं में सुधार की गति दावों के मुकाबले बहुत धीमी
महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार देने के तमाम सरकार दावों के बावजूद देश में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं है. देश में महिलाओं की स्थितियों में सुधार की गति… Read more
क्या मिल पाएगी छात्र राजनीति को नई दिशा
रवि त्रिपाठी किसी भी देश का विकास तभी संभव है जब वहां की जनता जागरूक हो। बात अगर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रा की हो, तो यह और भी जरूरी… Read more
विविध
-
कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्
-राजेश त्रिपाठी पुण्य धरा भारत भूमि में भगवान ने समय-समय पर विविध अवतार ग्रहण कर सज्जनों के कष्टों का निवारण और दुर्जनों का संहार किया है। इन अवतारों में कृष्णावतार… Read more
- फ़िर से फिक्सिंग
- कॉमनवेल्थ थीम सॉंग: मधुर संगीत पर बेसुरे बोल
- टूटते दरख़्त
- भारतीय संस्कृति पर बढ़ा खतरा
- रमजान और स्वास्थ्य
दक्षिणावर्त
-
हिन्दू एक जीवन पद्धति
यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी… Read more
- वोट के लिए तुष्टिकरण आखिर कब तक ?
- कसाब को 72 जन्मों तक फांसी
- इट्ज ओनली हेप्पन इन इंडिया
- वोट की राजनीत
- मुस्लिम समाज का बदलता दृष्टिकोण
चौथा खंभा
-
एक भिखमंगा और एक गाँधीवादी – दोनों लतखोर…
न तो कभी पलटकर यह पूछता है कि “आखिर तू भिखारी क्यों रह गया? और इतने साल से भीख ही माँग रहा है तो आखिर वैसा कब तक बना रहेगा? क्या कभी अपने पैरों पर खड़ा होना भी सीखेगा?”, और न ही उस भिखारी को दो लात जमाकर मोहल्ले से बाहर करता है
- कवि हेमंत शेष को डॉ घासीराम वर्मा पुरस्कार
- बड़ा लेखक बनने के गुर
- मुगले-आजम--- अब भी जिंदाबाद !!!
- इलैक्ट्रॉनिक मीडिया नया विलन
- मनोरंजक खबरिया चैनल
सम्पादक उवाच
-
साफ़-सुथरे छात्र संघ चुनाव कैसे हों ?
छात्रसंघ चुनाव में लिंगदोह की सिफारिशों को लागू कराने के लिए चर्चा में रहा दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन इस साल भी मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभाने के दावे कर रहा है |… Read more
- संसदीय चुनाव भी क्यों ना बंद कर दिया जाए ?
- जनता के साथ हैं और महंगाई के विरोध में
- हर साख पे भ्रष्टाचारी बैठा है !
- अल्पसंख्यक जातियां हासिये पर चली जाएँगी !
- संवेदना यानी क्रन्ति की ह्त्या के प्रयास
सेक्स और समाज
-
क्या गलत है सेक्स शिक्षा ?
आज लिखने तो बैठ गया हूँ, पर अपने को यह समझा नहीं पा रहा हूँ की आखिर आज का विषय क्या होगा ? कुछ सोचने की कोशिश करता हूँ तो… Read more
- लोक कल्याण के नाम पर
- आप बच्चों के बाप हैं अथवा बच्चे आपके बाप --- तय करें
- केवल सेरलीन को ही ढकोगे
- गाँधी का उन्मुक्त या नाटकीय सेक्स जीवन
- क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?
दस्तावेज़
-
” भारत की जनगणना 2011 ” एक नज़र
” भारत की जनगणना 2011 ” काफी चर्चा में है | जाती के आधार को लेकर राजनीतिक बबाल मचा हुआ है जबकि अभी तक कोई निश्चित फैसला सरकार की ओर… Read more
- असंठित श्रमिकों की वर्तमान स्थिति
- कौटिल्य के बारे में मणिशंकर प्रसाद के विचार
- झूठ नहीं बोलता इतिहास:जगदीश चंद्रिकेश
- हिन्दू मन की खोज
- भारत में 'अपग्रेडेशन ' की परम्परा
साहित्य
-
हाय ! ऐसी मोहब्बत
इस भरी दोपहरी में, क्यूँ शमा जलाए बैठी हो | किसका इंतजार है , जो द्वार खोले बैठी हो|| ये कैसी तलब है, जो पलके बिछाए बैठी हो| ये कैसी… Read more
- पटना में फ़ैज अहमद फ़ैज का जन्मशताब्दी समारोह
- देश के वर्तमान हालात
- स्वार्थी नेताओं के कारनामे
- जी लेने दो
- नज़्म
ब्लॉग हलचल
-
सावन में चाँद बमुश्किल दिखता है
नमस्कार ! ” ब्लॉग हलचल ” की साप्ताहिक चर्चा में इस बार कुछ नये साहित्यिक ब्लॉग की रचनाओं को आपके समक्ष अवलोकन के लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ | इन… Read more
- ' स्वतंत्रता ' के मायने
- सॉल्यूशन तलाशने वाले हाथ प्रॉब्लम में (ब्लॉग हलचल)
- हिन्दी लिखना सीख रही हूँ ….
- ब्लॉगरों की तालिबानी संसद!
- ब्लॉग - संसद पर एक कविता

